मेरठ। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अशफाक सैफी ने कहा है कि मदरसों के बच्चों तभी कंप्यूटर पर पढ़ाई करेंगे, जब वहां पर अच्छे शिक्षक आएंगे। मदरसों में आधुनिक सुविधाओं की जरूरत है। इसके लिए मदरसों के लिए मिलने वाली सहायता राशि दोबारा शुरू कराने के लिए केंद्र व राज्य सरकार से सिफारिश करेंगे। प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। सरकार से मिलने वाली सहायता बंद होने से मदरसों के अध्यापकों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया।
शकूरनगर में एक शोकसभा में शामिल होने आए अशफाक सैफी ने अमर उजाला से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि मदरसे के बच्चों के एक हाथ में कुरआन हो और दूसरे हाथ में कंप्यूटर। उन्होंने कहा कि मदरसों में आधुनिक शिक्षा के लिए सुविधाएं भी चाहिए। अध्यापकों को वेतन न मिलने से इस पर असर पड़ेगा, बेरोजगारी बढ़ेगी।
सरकार द्वारा मदरसों की कराई जा रही जांच के सवाल पर सैफी ने कहा कि यह कोई जांच नहीं बल्कि सर्वे किया जा रहा है। इससे किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। सर्वे के पीछे मंशा यह है कि मदरसों के नाम पर जो फर्जीवाड़ा किया जा रहा है वह बंद हो। मदरसों में अधिकतर मुस्लिम समाज के गरीब बच्चे पढ़ते हैं। उन्हें बेहतर माहौल मिले और साफ-सफाई हो। पानी की उपलब्धता हो। सरकार इसपर ध्यान दे रही है। सरकार की मंशा गलत नहीं है। मदरसा माफिया इसे नकारात्मक रूप से प्रचारित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबका साथ सबका विकास का वादा है। हमारे बच्चे बड़ी संख्या में यूपीएससी की परीक्षाओं में कामयाबी हासिल कर रहे हैं। सिविल सर्विसेज और पीसीएस जे में भी अच्छी संख्या में अल्पसंख्यक बच्चे चुने जा रहे हैं।
इससे पहले अशफाक सैफी ने असलम सैफी के आवास पर पहुंचे और असलम से मिलकर उनकी मां के पिछले दिनों हुए निधन पर शोक व्यक्त किया। इस मौके पर असलम सैफी के अलावा आसिफ सैफी, आलम सैफी, मुस्तफा अकरम, सरबजीत कपूर, हाजी सलीम, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी नासिर सैफी, अंजुम निजामी, दानिश खान, डॉ. युनुस, जुबैर, आरिफ और इकबाल सैफी मौजूद थे।