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Meerut News: इटायरा गांव में गरजा बुल्डोजर, 210 बीघा जमीन कब्जा मुक्त

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मेरठ। परतापुर के इटायरा गांव की 210 बीघा सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए बृहस्पतिवार को प्रशासन का बुल्डोजर गरजा। 71 साल बाद प्रशासन ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणाधीन मकान, प्लाट और चाहरदीवारी को 11 घंटे में बुल्डोजर से ध्वस्त कराकर कब्जा मुक्त करा लिया। धवस्तीकरण के बाद जमीन के चारों तरफ तारबंदी भी शुरू कर दी गई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक दर्जन से अधिक लोगों को नजरबंद रखा। जमीन ग्राम पंचायत को देकर ग्राम प्रधान इटायरा मामचंद के सुपुर्द कर दी गई।
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परतापुर के इटायरा गांव में 610 बीघा ग्राम समाज की सरकारी जमीन है। इस पर ग्रामीणों ने कब्जा था। 400 बीघा जमीन का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। 210 बीघा जमीन अभिलेखों में ग्राम समाज की है। इसे कब्जा मुक्त करने के लिए बृहस्पतिवार सुबह 6:00 बजे ही एडीएम प्रशासन अमित कुमार सिंह एसडीएम सदर ओजस्वी राज, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, एसपी सिटी, सीओ ब्रह्मपुरी और परतापुर पुलिस के साथ दो कंपनी आरएएफ, दो कंपनी पीएसी सहित करीब 1200 पुलिसकर्मियों की टीम इटायरा गांव पहुंच गई। भारी पुलिस बल देखकर ग्रामीण घरों से बाहर आ गए। प्रशासन ने इटायरा स्थित कोतवाल खाते की 210 बीघा जमीन को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की, लेकिन भारी पुलिस बल के सामने कोई विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। 280 निर्माणाधीन मकान, प्लाट, चाहरदीवारी व कई फैक्ट्रियों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। जमीन पर खड़ी फसल को भी नष्ट कराया गया। शाम पांच बजे तक कार्रवाई के बाद पुलिस फोर्स लौट गया। रात में पैमाइश कर जमीन को समतल कर पिलर और तारबंदी की कार्रवाई चलती रही। कार्रवाई के दौरान पुलिस फोर्स के खाने-पीने की व्यवस्था के लिए इटायरा स्थित मंदिर में भोजन भी तैयार कराया गया।
गरीबों की बस्ती मंगी कॉलोनी भी ध्वस्त
आजाद समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष पवन गुर्जर ने बताया कि इटायरा गांव के मार्ग पर मंगी कॉलोनी बसी है। यहां गरीब लोग रहते हैं। उनके मकान तक ध्वस्त कर दिए गए। सरकारी जमीन को बेचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन ने किसी को कार्रवाई से पहले कोई नोटिस नहीं दिया। विरोध करने वालों को नजरबंद कर दिया।
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ग्राम समाज की 210 बीघा को कब्जा मुक्त कराया है। जिन मकानों में गरीब परिवार रहता है, उनको अभी ध्वस्त नहीं कराया गया। उक्त सरकारी जमीन पर काबिज लोगों को पहले नोटिस दिया गया, जवाब न देने पर प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। 400 बीघा जमीन का मामला अभी हाईकोर्ट में चल रहा है।
दीपक मीणा, डीएम
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जिस घर में परिवार रहते है, उन पर कार्रवाई नहीं की

एसडीएम सदर ओजस्वी राज का कहना है कि 210 बीघा जमीन में बने चार-पांच मकान में परिवार रहते है, जिसको अभी ध्वस्त नहीं किया गया। उक्त परिवार को समझाया गया है और नोटिस भी दिया गया। वह मकान खाली करेंगे, तभी उनको ध्वस्त किया जाएगा। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि कानून के तहत ही ग्राम समाज की जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। किसी ने विरोध नहीं किया। इक्का-दुक्का लोग आए थे, जिनको समझाकर भेज दिया गया।

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1952 में जमींदारी के खिलाफ बने कानून से बचने के लिए जमीदारों ने बेची थी जमीन
कानून से खेलते रहे जमींदार, तहसील से कराए थे अभिलेख गायब
माई सिटी रिपोर्टर

मेरठ। अपनी हुकूमत बरकरार रखने के लिए जमींदारों ने कानून से खेलते रहे, जिसमें नौकरशाह भी भागीदार बने। लेखपाल से लेकर तहसील तक जमींदारों ने सरकारी अभिलेख भी गायब करा दिए। सरकारी जमीन में पट्टे बनाकर जमींदारों ने गरीबों को दे दी। कानून बनते गए और जमींदार नये-नये पैंतरे चलते रहे। इटायरा गांव में भी कई जमींदारों ने बड़ा खेल खेला। प्रशासन ने 1950 से पहले के अभिलेखों को खंगाला, तब जाकर सरकारी जमीन का पता चला।
जमीदारों के अत्याचार के खिलाफ 1950 में जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम लाया गया। इससे बचने के लिए जमींदारों ने नया पैंतरा निकाल लिया। कुछ गरीबों को सरकारी जमीन में पट्टे बनाकर दे दिए। सीलिंग और फिर चकबंदी आई तो लेखपाल और तहसीलों में सांठगांठ कर सरकारी जमीन के अभिलेख ही गायब करा दिए। ग्राम समाज के रजिस्टर तक भी चोरी कराए, ताकि जमींदारों की हुकूमत बरकरार रहे। प्रदेश सरकार ने सरकारी जमीन का पता लगाने के लिए डीएम को निर्देश दिए। इससे पहले जिला प्रशासन सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराते कुछ लोग कोर्ट चले गए। प्रशासन ने कुछ जमीनों का पुराना रिकॉर्ड खंगाला, जिसके बाद अब इटायरा गांव में 210 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराई गई।


400 बीघा जमीन के अभिलेख नहीं मिले

इटायरा गांव में 400 बीघा जमीन के अभिलेख न प्रशासन कोर्ट में प्रस्तुत कर सका और न ग्रामीण। जिसके चलते कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने की बात कही है। इस 400 बीघा को ग्राम समाज का होने का दावा प्रशासन करता है, उतना ही ग्रामीणों का अपना दावा है। जिसको लेकर अभी कोर्ट का कोई निर्णय नहीं आ सका। हालांकि प्रशासन दावा करता है कि जल्द ही इस जमीन के पुराने दस्तावेज तलाश कर कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे।
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