एक साल में महंगा हो गया घर बनाना
मेरठ। घर बनाना लगातार महंगा हो रहा है। एक कमरा बनाने के लिए उत्तम श्रेणी की ईंट से 2021 तक दो लाख रुपये खर्च होते थे। अब ये बढ़ कर 3.50 लाख हो गया है। इस दौरान सीमेंट के साथ सर्वाधिक वृद्धि ईट की कीमतों में हुई है। औसत 100 गज का मकान बनाने में 50 हजार ईंट लगती हैं। अव्वल ईट का रेट चार माह में 5 हजार से बढ़कर 6,500 रुपये हो गया है। ऐसे में 2.50 लाख की जगह अब लोगों को 75 हजार रुपये ज्यादा यानी 3.25 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
ईट भट्ठा निर्माता संघ से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पहले भट्ठा संचालकों को एक प्रतिशत जीएसटी देनी होती थी, जो छह प्रतिशत कर दी गई है। ईट भट्ठा चलाने में सर्वाधिक कोयले का प्रयोग किया जाता है। छह माह में कोयले के दाम आठ हजार रुपये से बढ़कर 25 हजार रुपये प्रति टन हो गए हैं। पहले भट्ठे एक अक्तूबर से 30 सितंबर तक चलाए जाते थे। एनजीटी के आदेश के बाद भट्ठे मार्च से जून तक चलाने की अनुमति है।
इस साल मार्च में भट्ठे चलाने की अनुमति नहीं दी गई। भट्ठा स्वामी कोर्ट में गए तो 9 अप्रैल को भट्ठे शुरू हुए और 30 जून को बंद कर दिए गए। भट्टा स्वामियों से खनन के लिए पूरे वर्ष की रायल्टी के तौर पर दो लाख रुपये अतिरिक्त लिए जाते हैं।
ये बोले भट्ठा संचालक
कारोबार पर असर, खर्च निकालना मुश्किल
ईंट बनाने में प्रयोग होने वाले कोयले के साथ सभी के भाव दो से तीन गुना हो गए हैं। निर्माण की अवधि घटाए जाने से गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
- संजय गोयल गोदावरी, भट्टा संचालक
संगठन ने बनाई आंदोलन की रूपरेखा
देश भर के ईंट भट्ठा संचालकों द्वारा 10 नवंबर को आंदोलन की रूपरेखा बनाई गई है। जीएसटी मुक्त करना और कार्य अवधि बढ़ाना हमारी प्रमुख मांग है।
- केपी सिंह, अध्यक्ष, मेरठ जनपद जनपद ईट निर्माता समिति
ईंट निर्माताओं के साथ कर्मचारी भी प्रभावित
ईट भट्ठे सिर्फ तीन माह चलने से लाखों मजदूर नौ माह के लिए रोजगार से वंचित हो जाते हैं। साथ ही माल भी मांग के अनुपात में तैयार नहीं हो पा रहा है।
- पवन मित्तल, महामंत्री, ईट निर्माता समिति
समय अवधि लगातार घटा रही सरकार
ईट निर्माता पहले नौ माह कार्य करते थे। अब सरकार ने चार माह भट्ठे चलाने की अनुमति दी। वर्ष 2022 में तो भट्ठे सिर्फ तीन महीने ही चलाए जा सके।
- सतीश कुमार गुप्ता, भट्ठा संचालक