सरूरपुर। कस्बा निवासी 12 वर्षीय मासूम के साथ हुई दरिंदगी ने उसकी जिंदगी की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आरोपी की हैवानियत का शिकार हुई यह बच्ची सात माह की गर्भवती है। यह घटना न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए भी आत्ममंथन का विषय है। आरोपी की हैवानियत ने मासूम के भविष्य को चुनौतियों भरा बना दिया। इतनी कम उम्र में मां बनने की स्थिति ने इस बच्ची के बचपन, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल दिया है। आने वाले समय में उसे कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सीएचसी की महिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. सोनिया ढाका ने बताया कि इतनी कम उम्र में बच्चे की डिलीवरी कराना मुश्किल है। कम उम्र में गर्भधारण से गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। बच्ची के स्वास्थ्य की देखभाल बहुत जरूरी है। यदि बच्ची को कोई समस्या हो तो तुरंत चिकित्सक के पास ले जाया जाए। डिलीवरी के समय बच्ची को बड़े अस्पताल में ही भर्ती कराया जाए। बच्ची का शारीरिक क्षमता बच्चे को जन्म देने की नहीं है। आरोपी की गिरफ्तारी और सजा जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि समाज अपनी सोच बदलकर पीड़िता को खुले दिल से अपनाए और उसे यह एहसास कराए कि वह अकेली नहीं है।