मेरठ। गरीब बेरोजगारों को 100 दिन का रोजगार देने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) गोलमाल और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। लोकपाल मनरेगा
अंशु त्यागी की जांच में खुलासा हुआ है कि कागजों में चकरोड, सड़क, तालाब आदि निर्माण कार्य दिखाकर भुगतान कर दिया है। जॉब कार्ड होने के बावजूद मनरेगा मजदूरों को काम न देने सहित 50 से ज्यादा शिकायतों की जांच अभी जारी है।
योजना में मजदूरों से सड़कों, नहरों, तालाबों, कुओं के निर्माण कार्य कराए जाते हैं। गांव से पांच किलोमीटर के दायरे में रोजगार देना होता है। जिम्मेदारों ने कागजों में विकास कार्य कराकर भुगतान करके गोलमाल किया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मनरेगा में भ्रष्टाचार के मामलों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और आए दिन शिकायतें आ रही हैं। कई मामलों की जांच में सरकारी मुलाजिम सहयोग नहीं कर रहे हैं। लोकपाल का आरोप है कि कुछ मामलों में अफसरों को पत्र लिखकर पत्रावलियां मांगी हैं, मगर मिल नहीं रही हैं। इससे जांच लंबित हो रही है। लोकपाल का कहना है कि मनरेगा के भुगतान में तकनीकी सहायक, बीडीओ, एकाउंटेंट, गांव प्रधान और सचिव की संस्तुति होती है।
ऐसे हुआ गोलमाल
केस-एक : इटायरा में कागजों में तालाब का काम कराया गया। शिकायत पर जांच हुई जो आरोप सही निकले। इस बारे में लघु सिंचाई विभाग से दस्तावेज मांगे गए, मगर नहीं मिल रहे। जेई, एई और एक्सईएन को भी पत्र लिखा जा चुका है। अब डीएम के माध्यम से ऐसे दस्तावेज मंगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
केस-दो : गांव डाहरा में चकरोड और नाले का काम भी कागजों में दिखा दिया गया। जांच में न तो नाले की खोदाई मिली और न चकरोड का निर्माण। इस मामले में ग्रामीणों से बयान लिए गए।
केस-तीन : गगोल में भी ऐसे ही कुछ निर्माण कार्य दिखाकर भुगतान दर्शाया गया। इस गोलमाल में शामिल लोगों के खिलाफ डीएम से कार्रवाई की संस्तुति हो चुकी है।
इन गांवों में भी मिलीं शिकायतें
- रजपुरा, बटीपुरा, नगला साहू, डाहर, पीपली खेड़ा, गगोल, सौदत, टिमकिया, रतौली, रतौड़ा खुर्द, मवी कुतुबपुर, जई सहित अन्य गांवों में भी शिकायतें मिली हैं। जांच में यहां भी गोलमाल सामने आया है।
मनरेगा : जिले की स्थिति
-एक अप्रैल 2008 में शुरू हुई
- विकास खंड 12
- ग्राम पंचायत 479
- जॉब कार्ड निर्गत 66908
- एक्टिव जॉब कार्ड 37978
- पंजीकृत श्रमिक परिवार 77063
-वर्जन
मनरेगा में काम दिलाने के नाम पर हुए गोलमाल पर जांच के बाद डीएम से कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वर्तमान में 50 से ज्यादा शिकायतों की जांच की जा रही है। लोगों को जाॅब कार्ड के बावजूद रोजगार नहीं दिया जा रहा है। जॉब कार्ड के बावजूद जिन्हें रोजगार नहीं मिला है, उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। - अंशु त्यागी, लोकपाल, मनरेगा।
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- कई लोग अपीलीय अथाॅरिटी मनरेगा ग्राम विकास लखनऊ गए हैं। वहां से फैसले के बाद वसूली की कार्रवाई होगी। - एसएन चौरसिया, उपायुक्त (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन)।