उत्तर प्रदेश के बिजनौर में झालू में आठ साल पहले झालू में मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया गया, लेकिन अब तक स्टेडियम में ताला लटका हुआ है। खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। वहीं कस्बे के लोग मॉर्निंग वॉक करने से भी वंचित हैं।
कस्बा झालू में बस स्टैंड के समीप हृदयानंद कीड़ा स्थल का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया, लेकिन इसे हैंडओवर किए जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि अभी 15 प्रतिशत काम अधूरा है। फिलहाल मिनी स्टेडियम के गेट पर ताला लगा हुआ है। मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेलकूद के लिए लगाई गई सामग्री भी धूल चाट रही है। पुष्पेंद्र अग्रवाल, उमेंद्र अग्रवाल, सुमन, सुनीता, मो. जावेद, बीना, संध्या, रचित अग्रवाल, इति, सौरभ अग्रवाल, बलवंत वैशाली देवी सुधा, रामपाल सिंह प्रदीप आदि का कहना है कि स्टेडियम न खुलने से खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते हैं।
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साजन सिंह एडवोकेट का कहना है कि सरकारी मशीनरी के सुस्त रवैये के कारण हृदयानंद कीड़ा स्थल का अभी तक प्रारंभ नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
डॉ. शुजाउद्दीन का कहना है कि वह वॉलीबाल के खिलाड़ी रह चुके हैं। सन 1985 में टूर्नामेंट में जिला स्तर पर ट्रॉफी जीती थी। तब के समय में भी खिलाड़ियों को खेलने के लिए कस्बा झालू में मैदान उपलब्ध नहीं थे और आज भी नहीं है।
डॉ. जीसी राय बंगाली का कहना है कि वह फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। झालू में मिनी स्टेडियम न चलने से खिलाड़ियों की प्रतिभा पर अंकुश लग रहा है। प्रशासन से स्टेडियम को शीघ्र चालू करने की मांग करते हैं।
अख्तर हुसैन का कहना है कि लगभग पिछले 35 वर्षों से क्रिकेट खेल रहे हैं। वह अनेक बार नगर पंचायत प्रशासन से मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम को शीघ्र चालू करने की मांग कर चुके हैं।
झालू निवासी शादाब नजर वर्तमान में एयर फोर्स में तैनात हैं। एयरफोर्स की तरफ से रणजी ट्रॉफी में खेल रहे हैं। उनके भाई खालिद परवेज बताते हैं कि उनके भाई शादाब नजर को झालू में खेल का मैदान न होने के कारण अभ्यास करने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता था।