बागपत। शहर के एक मदरसे में जांच करने गए अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के साथ अभद्रता की गई। वहां सायरन बजाकर भीड़ एकत्र कर ली गई और उन पर हमले का प्रयास किया गया। इसके बाद अधिकारी ने किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाई। सीओ व एसडीएम से शिकायत के बाद भी कुछ नहीं किया गया।
जिले में 140 के करीब मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। सरकार ने इन मदरसों की जांच करके बिना मान्यता मिलने पर बच्चों को स्कूलों में शिफ्ट कराने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कैलाशचंद तिवारी जांच करने के लिए बागपत के एक मदरसे में गए थे। जब मदरसे के अंदर पहुंचे तो वहां दो व्यक्तियों ने उनके साथ अभद्रता करनी शुरू कर दी। जब अधिकारी ने अभिलेख दिखाने के लिए कहा तो अभिलेख दिखाने से मना कर दिया।
अधिकारी ने कार्रवाई करने की चेतावनी दी तो सायरन बजाकर लोगों को एकत्र कर लिया। इसके बाद वहां भीड़ ने अधिकारी को घेर लिया और उन पर हमले का प्रयास किया। उन्होंने किसी तरह वहां से निकलकर जान बचाई। वहां से निकलने के बाद सीओ को फोन किया, लेकिन वहां पुलिस नहीं भेजी गई। इसके बाद अधिकारी को वहां से बिना जांच करे ही वापस लौटना पड़ा।
पुलिस के बिना जांच करने नहीं जाएंगे अधिकारी
जिला अल्संख्यक कल्याण अधिकारी कैलाशचंद तिवारी ने कहा कि जब तक उनको सुरक्षा नहीं दी जाएगी। वह मदरसों की जांच करने के लिए नहीं जाएंगे। मदरसों की जांच के लिए एसडीएम, बीएसए, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व सीओ की समिति बनी हुई है। उन्होंने जांच के दौरान अपनी जान को खतरा बताया।
वर्जन
मैं विभागीय कार्य से इलाहाबाद आया हूं। मेरे पास अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का फोन आया था तो मैंने उन्हें कोतवाली से पुलिस लेकर जाने के लिए कहा था। इसके बाद क्या हुआ है, मुझे जानकारी नहीं है। इस मामले में जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - हरीश भदौरिया, सीओ