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Meerut News: हत्या के वक्त इजलाल के दिमाग में गूंज रहे थे शीबा के शब्द... तीनों को रास्ते से हटा दो

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मेरठ। गुदड़ी बाजार के तिहरे हत्याकांड में न्यायालय ने अपने 173 पेजों के निर्णय में इस घटना को विरल से विरलतम श्रेणी का न मानते हुए इजलाल समेत नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और जुर्माना लगाया। सभी दोषियों को पहले से कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा, इसलिए भी इस मामले में विरलतम श्रेणी का नहीं माना है। शीबा के मामले में अदालत ने 58 पेज का निर्णय दिया है। जिसमें माना है कि हत्या करते वक्त इजलाल के दिमाग में शीबा के शब्द गूंज रहे थे कि तीनों को रास्ते से हटा दो।
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22 मई वर्ष 2008 में गुदड़ी बाजार क्षेत्र में हुए सुधीर उज्ज्वल, सुनील ढाका और पुनीत गिरी की हत्या में 16 साल बाद न्यायालय अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2 पवन कुमार शुक्ला ने सोमवार को हत्या के दोषी को उम्रकैद और अर्थदंड से दंडित किया था। इस मामले में स्वतंत्र गवाह राजेश की गवाही काफी अहम रही।
उसके सामने शीबा ने कहा था कि मैंने इजलाल से कह दिया है कि अब सहन नहीं होता, इन तीनों को रास्ते से हटाना पड़ेगा। बाद में शीबा ने कोर्ट में अपने बयान में कहा था कि घटना के समय वह मेरठ में नहीं थी। दिल्ली में डेल कंपनी में नौकरी कर रही थी और नोएडा में अपने मौसा के यहां रहती थी। इस दौरान मेरठ का मकान बंद था। लेकिन वह कोर्ट में यह साबित नहीं कर पाई। कोर्ट ने माना कि घटना में मुख्य रूप से शीबा की भूमिका रही।
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पांच साल दस माह नौ दिन चली गवाही
14 जुलाई 2010 से गवाहों की गवाही शुरू हुई जो 5 साल 10 महीने और 9 दिन चली। जिसमें स्वतंत्र गवाह के रूप में वादी अनिल दुष्यंत तोमर, संदीप कुमार, अमित उज्ज्वल, सुशील कुमार व राजेश स्वतंत्र गवाह के रूप में पेश हुए। विवेचक सहित 12 पुलिस वालों की गवाही हुई और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर सुशील कुमार की गवाही हुई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु भी हो गई। एक आरोपी अभियुक्त शम्मी की गिरफ्तारी बाद में होने के कारण उसके मुकदमे की सुनवाई न्यायालय में विचाराधीन है। एक अन्य अभियुक्त का मामला किशोर न्यायालय में चल रहा है।

जीवन ईश्वर का दिया अमूल्य उपहार : न्यायालय
न्यायालय ने निर्णय में उल्लेखित किया कि मानवीय जीवन ईश्वर का दिया गया एक अमूल्य उपहार है तथा सभी को जीवित रहने का समान अधिकार है। न्यायालय ने उल्लेखित किया कि यह उचित है कि न तो कोई मर जाए न ही किसी के प्राण लिए जाएं और न ही किसी को फांसी पर लटकाया जाए। न्यायालय ने सभी दोषियों को उम्रकैद और अर्थदंड की सजा से दंडित किया।

शम्मी के मामले में होगी आज डॉक्टर की गवाही
न्यायालय अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2 की अदालत में एक अन्य आरोपी शमी के मुकदमे की सुनवाई चल रही है। बुधवार को इस मामले में मृतकों के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर कृष्ण कुमार की गवाही होगी। पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता प्रमोद त्यागी, सर्वेश शर्मा, पदम सिंह और मुकेश कुमार मित्तल एडीजीसी में न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा।
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