ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में पिछले कई माह से गुलदार का आतंक था। गुलदार अब तक कई निराश्रित गोवंश पशुओं को निवाला बना चुका है। गांव के लोग एकत्र होकर खेती बाड़ी का काम करने के लिए मजबूर हो रहे थे।
बिजनौर के नगीना सामाजिक वानिकी विभाग इलाके के शेरकोट थाने के गांव आराजी कांधला में रविवार सुबह एक मादा गुलदार वन विभाग की ओर से लगे पिंजड़े में कैद हो गई। गुलदार की आयु लगभग 5-6 साल की बताई गई है। रविवार जैसे ही ग्राम वासियों को गुलदार के पिंजड़े में कैद होने का पता लगा तो वह लाठी-डंडे लेकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
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वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और गुलदार को पिंजड़े सहित अपने साथ ले गए। वन दरोगा सुनील राजोरा ने बताया कि गुलदार को कहां छोड़ा जाएगा यह अभी नहीं बताया जा सकता, जैसे ही उच्च अधिकारी बताएंगे कार्रवाई की जाएगी।
आराजी कंधला के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में पिछले कई माह से गुलदार का आतंक था। गुलदार अब तक कई निराश्रित गोवंश पशुओं को निवाला बना चुका है। गांव के लोग एकत्र होकर खेती बाड़ी का काम करने के लिए मजबूर हो रहे थे।
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वन विभाग के अधिकारियों से कई बार कहने के बाद गांव में पिंजड़ा लगाया गया। वन विभाग ने शुक्रवार को गांव के राम अवतार के खेत के पास रास्ते के किनारे पिंजड़ा लगाया था। पिंजड़े में एक काले कुत्ते को बांधा था। जिससे गुलदार कुत्ते के लालच में पिंजड़े में कैद हो जाए।
बताया गया कि रविवार सुबह जब गांव के लोग शौच के लिए जंगल जा रहे थे। तब उन्हें पिंजड़े में जोर के खटका होने की आवाज सुनाई दी। पिजड़े में गुलदार के फंसने की खबर मिलते ही गांव के लोग लाठी डंडे लेकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। देखते ही देखते लोगों की भीड़ जमा हो गई।
भीड़ को देख गुलदार दहाड़ लगा रहा था। बड़ी बात यह है कि गुलदार ने पिंजड़े में कैद होने के बाद भी कुत्ते को निवाला नहीं बनाया। कुत्ता भी पिंजरे में सही सलामत रहा। बाद में वन विभाग के अधिकारियों ने कुत्ते को पिंजड़े से भगा दिया। गुलदार को पिंजरे समेत अपने साथ ले गए।
जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से गुलदार को पिंजड़े में बंद करने के लिए एक काले कुत्ते को बांधा था। गुलदार कुत्ते के लालच में आकर पिंजड़े में कैद तो हो गया लेकिन कुत्ते पर हमला कर उसे मौत के घाट नहीं उतरा। कुत्ता पिंजड़े में एक कोने में सुरक्षित खड़ा रहा। लोगों का कहना था कि जिसको राखे साइयां भैया मार सके ना कोई कहावत चरितार्थ हुई। गुलदार को अपनी जान बचाने भारी पड़ी। इसलिए गुलदार ने कुत्ते को निवाला नहीं बनाया।
मादा गुलदार को दो शावकों के साथ फिर देखा - ग्रामीण
गांव वालों का कहना है कि क्षेत्र में केवल एक ही गुलदार नहीं है, बल्कि रविवार सवेरे माता गुलदार दो शावकों के बाद क्षेत्र में विचरण करती हुई देखी गई। वन विभाग के अफसरों से मादा गुलदार को शावकों सहित पकड़ने की मांग की है।