...वृद्धाश्रम में छोड़कर मां-बाप, मस्जिद में खुदा ढूंढने निकले
मेरठ। भारत विकास परिषद मेरठ कैंट शाखा के तत्वावधान में सोमवार को चैंबर ऑफ कॉमर्स में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ कवि सुमनेश सुमन ने किया। युवा कवि सुल्तान सिंह ने कहा कि कलम बेजार है गम से, बड़ी ही आज गुमुसम है, कहीं मिसरा नहीं पाया, कहीं मतला लगे गुम है। मेरी इस जिंदगी पर क्या गजल लिखकर सुनाऊं मैं, मेरी इस जिंदगानी से रदीफों काफिया गुम है। कवियत्री डॉ. सरोज तन्हा ने कहा कि अपनी आजाद ख्याली में गिरफ्तार रहे, तमाम उम्र जमाने के गुनहगार रहे। गैरत-ए-इश्क ने हमको कभी झुकने न दिया, गमगुसारों से घिरे होके भी खुद्दार रहे। कवि सुमनेश सुमन ने देशभक्ति की रचनाओं से समां बांधा। मेरा अरमान रह जाये वतन की शान रह जाये, जमाने में सुमन गंगाजली पहचान रह जाए, तिरंगे का निशां थोड़ा मुझे भी तो मयस्सर हो, मेरे होठों पे जिंदाबाद हिंदुस्तान रह जाए। शायर डॉ. कृष्ण कुमार बेदिल ने गजल पढ़ते हुए कहा कि सैलाब से जो कुछ भी बचा ढूंढने निकले, पानी से जो पानी पे लिखा ढूंढने निकले। वृद्धाश्रम में छोड़ के मां बाप को बच्चे, मस्जिद में शिवालों में खुदा ढूंढने निकले। संस्थापक संरक्षक नरेंद्र अग्रवाल, शाखाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, सचिव तेजपाल भसीन, ट्रेजरार पवन गर्ग, प्रभात कपूर, जीएस सिद्धू, मनीष गुप्ता, योगेश रस्तोगी, सर्वेश गर्ग, डॉ. अंबरीश शर्मा, सुनील गर्ग व हरिओम अग्रवाल ने योगदान दिया। संचालन व संयोजन डॉ. कृष्ण कुमार बेदिल ने किया।
खास बातें:
- चैंबर ऑफ कॉमर्स में हुआ भाविप का कवि सम्मेलन