मेरठ। आरटीआई के तहत 19 जून 2014 को सीएमओ से तीन बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थीं। लेकिन विभाग से समय से सूचना नहीं दी गई। इसके बाद वादी सुनील कुमार शर्मा ने 16 फरवरी 2015 को उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में वाद दायर किया, जिसमें सुनवाई के बाद 25 अगस्त 2015 को नोटिस जारी किया गया। सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान वादी तो हाजिर हुआ, लेकिन मुख्य चिकित्साधिकारी नहीं पहुंचे। सूचना आयोग के लगातार नोटिस के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। यह अर्थदंड मुख्य चिकित्साधिकारी के वेतन से वसूल किया जाएगा।