मेरठ। संसार में किसी भी कार्य के लिए इच्छा, ज्ञान और क्रिया यानी तीन तत्वों की आवश्यकता होती है। मां भगवती सर्वोपरि तत्व है। इसलिए श्रीकृष्ण से पहले राधा, राम से पहले सीता और नारायण से पहले लक्ष्मी का स्मरण होता है। यह प्रवचन कथा व्यास श्रीकांत शर्मा ने मंगलवार को बाबा औघड़नाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में दिए। उन्होंने कहा कि महामाया के द्वारा ही संसार की रचना होती है। हृदय में जो गुण होता है उसी का प्रभाव उसके जीवन पर दिखाई देता है। प्रकृति के तमोगुण अंश से पंच महाभूतों का निर्माण, रजो गुण से इंद्रियों का निर्माण होता है। इसी प्रकार मनुष्य का शरीर एक मकान के समान है। उसमें 24 तत्वों का मिश्रण किया गया है। तब यह शरीर बना है। भगवती की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है। मुख्य यजमान डॉ. रामकुमार गुप्ता रहे। डॉ. महेश बंसल, सतीश सिंहल, धीरेंद्र सिंहल, अजय बंसल, सुनील गोयल, सुधीर अग्रवाल, अतुल अग्रवाल, ब्रजभूषण गुप्ता, मुकेश गुप्ता, कैलाश चंद आदि मौजूद रहे।