भविष्य केसमीकरण का नया ताना बाना तो नहीं
मेरठ में दलित मुस्लिम समीकरण भविष्य की चुनावी राजनीति का नया ताना बाना तो नहीं। लोकसभा चुनाव 2014 की बात करें मेरठ में सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने जीत का परचम लहरा दिया था। उन्हें इतने ज्यादा वोट मिले थे कि बाकी मुख्य दलों के उम्मीदवारों के कुल वोट मिलाकर उनके बराबर थे। इसके बाद विधानसभा चुनाव आया तो भी यही स्थिति रही। मेरठ दक्षिण सीट पर बसपा उम्मीदवार याकूब कुरैशी को दलित वोट तो खूब मिले पर मुस्लिमों ने साइकिल तथा कांग्रेस गठबंधन की सवारी की। नतीजा कांग्रेस प्रत्याशी आजाद सैफी को भी सत्तर हजार वोट मिल गए। ऐसे में भाजपा के सोमेन्द्र तोमर ने धमाकेदार जीत हासिल कर ली। कैंट सीट में भाजपा जीती। हालांकि शहर सीट पर सपा उम्मीदवार रफीक अंसारी ने चुनाव जीता। सिवालखास, किठौर, सरधना तथा हस्तिनापुर में भाजपा ने दलित तथा मुस्लिमों के इसी भटकाव से जीत की पटकथा लिख दी। इस बार दलित मुस्लिम समीकरण बना तो निश्चित रूप से यह भाजपा और सपा दोनों केलिए ही आने वाले चुनाव में खतरे की घंटी है।