मेरठ। रछौती में शौचालय निर्माण के घोटाले मामले में डीएम समीर वर्मा का कहना है कि यहां कोई गड़बड़ी नहीं है। जितने शौचालय बने उतना ही पैसा दिया गया। बाकी का पैसा बैंक खातों में सुरक्षित है। सीडीओ से भी जांच कराई। उनकी रिपोर्ट भी पुष्टि करती है। बीडीओ और डीडीओ की रिपोर्ट भी कह रही है कि यहां कोई गबन नहीं है। डीएम के मुताबिक शासनादेश कहता है कि ओडीएफ का पहला सत्यापन ग्राम पंचायत द्वारा की गई घोषणा के तीन माह के अंदर किया जाएगा। दूसरा सत्यापन मंडल स्तर पर छह माह के भीतर होगा। अभी तो ये सत्यापन भी नहीं हुए। इन सत्यापनों का तो कम से कम इंतजार किया ही जाता। इस बाबत पंचायती राज अनुभाग के प्रमुख सचिव चंचल तिवारी की ओर से पूरी गाइडलाइन जारी की गई है। इस अभियान का उद्देश्य यह भी है कि किसी का शौचालय ऐसे ही नहीं बनवाया जाएगा। पहले इसके लिए लाभार्थी को प्रेरित किया जाएगा। जब लाभार्थी खुद इसका निर्माण शुरू कर देगा तब उसे लाभ की राशि की किश्त दी जाएगी। शासन के इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए काम चल रहा है। रही बात पदक की तो शासन ने अभियान को तेज गति से चलाने वाले जिलों को पुरस्कृत किया है। ओडीएफ लंबी प्रक्रिया है और चरणबद्घ तरीके से काम किया जा रहा है वह भी शासन के निर्देशों के क्रम में। इस बाबत लोगों को नियमों की जानकारी कम और भ्रम फैलाया जा रहा है।