पेड़ों की छांव से पड़ गया नाम ठंडी सड़क
मेरठ। पाइप पार्क चौराहा से कुलवंत सिंह स्टेडियम तक सड़क के दोनों तरफ दूर-दूर तक बड़े बड़े पेड़ थे। पेड़ों की छांव में बैठकर अंग्रेज ठंडक का अहसास करते थे। अंग्रेजों ने ही इस सड़क का नाम ठंडी सड़क रखा था। आज भी लोग इस सड़क पर ठंडक का अहसास करते हैं। सड़क किनारे भले ही पेड़ कम हो गए हों, लेकिन ठंडक अभी बनी है। शहर में कुछ घराने तो अभी भी बाहर से आने वाले अपने रिश्तेदारों को इस सड़क की ठंडक का अहसास कराते हैं। ठंडी सड़क आर्मी क्षेत्र से गुजर रही है। वीर अब्दुल हमीद द्वारा युद्ध में पाकिस्तान से जीता गया टैंक भी गांधी बाग चौराहा पर रखा है। यह ठंडी सड़क पर घूमने वाले लोगों को भारत-पाक युद्ध की भी याद ताजा करता है।