रोहाना कलां/चरथावल। रोहाना गन्ना विकास समिति का नया भवन नए पेराई सत्र में शुरू हो जाएगा। 1.86 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन को तैयार किया जा रहा है। समिति से 72 गांवों के 33 हजार किसान सम्बद्ध हैं। खस्ताहाल बिल्डिंग में चल रहे कार्यालय से किसानों को राहत मिलेगी।
चरथावल विकास खंड क्षेत्र का गन्ना समिति का दफ्तर रोहाना मिल परिसर में संचालित है। पुरानी बिल्डिंग बरसात में टपकती है। किसानों का कहना है आजादी के बाद इसी भवन में क्षेत्र के किसानों का गन्ना सट्टा एवं खाद बीज, कृषि उपकरणों पर ऋण आदि का कार्य हाेता चला आ रहा है। दशकों से किसानों की मांग थी कि समिति का नया भवन बने ताकि किसानों और कर्मचारियों को खुले में रोजमर्रा के काम कराने में आसानी रहे।
गन्ना समिति के वार्षिक अधिवेशन में गन्ना समिति के भवन को बहेड़ी में बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था। वहां पहले से रेलवे के किनारे समिति की भूमि है। वहां खाद और बीज गोदाम संचालित है। गन्ना विभाग ने गोदाम के रखरखाव के लिए चहारदीवारी कराई है। इसी परिसर में नए लुक का समिति का भवन निर्माणाधीन है। इसमें सात कमरे और मीटिंग हॉल बनाया जा रहा है। जबकि वर्तमान समिति के दफ्तर में किसानों की आम सभा कराने के लिए कोई हॉल नहीं है।
राकेश मलिक एडवोकेट, कुबेर दत्त त्यागी, पूर्व सभासद सत्तार त्यागी, सुधीर सिंघल आदि कहना है कि अरसे बाद जर्जर भवन के स्थान पर किसानों को नए भवन की सौगात मिलेगी। किसानों का गन्ना संबंधी रिकाॅर्ड आसानी से उपलब्ध रहेगा। पुरानी बिल्डिंग जर्जर हालत में है। कक्ष संकरे होने से पूरे भवन में अंधेरा रहता है।
72 गांवों के 33 हजार किसान सम्बद्ध
गन्ना समिति के अधीन रोहाना मिल के अलावा तितावी, खाईखेड़ी, बजाज थानाभवन, देवबंद त्रिवेणी शुगर मिल देवबंद के करीब 33000 किसान संबद्ध है। चरथावल कसबे सहित कुटेसरा, रोहाना, बधाई कलां आदि 72 गांवों के किसान इस समिति के माध्यम से गन्ना आपूर्ति करते हैं। नए पेराई सत्र में बिरालसी समिति का नया भवन आमामी पेराई सत्र में शुरू होने की उम्मीद है। रोहाना समिति से हटकर 23 गांव के 11 हजार किसान बिरालसी समिति से जुड़ जाएंगे।
रोहाना गन्ना समिति सचिव शशि प्रकाश सिंह ने बताया आगामी पेराई सत्र में नया भवन शुरू हो जाएगा। किसानों के गन्ना आपूर्ति संबंधी कामकाज नए भवन में होगा। किसानों की सहूलियत के मुताबिक मीटिंग हॉल बन रहा है। 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि गन्ना परिषद संबंधी कार्य पुराने भवन में संचालित होता रहेगा।