भाषाओं के साथ संस्कारों की जननी है संस्कृत
कंकरखेड़ा। लाला मोहम्मदपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा सरल संस्कृत संभाषण शिविर के अंतर्गत संस्कृत वाग्व्यवहार कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्कृत प्रशिक्षक विशाल प्रसाद ने बताया कि संस्कृत भाषा संस्कारों की जननी है। इस भाषा को व्यवहारों में प्रयोग करने से स्वयं ही प्रत्येक व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है। संस्कृत भाषा अत्यंत सरल व मधुर है। दुनिया की अन्य कोई भी भाषा ऐसी नहीं है। जो इतनी माधुर्ययुक्त सरल और सरस हो। ये जैसी लिखी जाती है, वैसी ही उच्चारित भी की जाती है। इसके उच्चारण मात्र से ध्वनि रुप में अत्यंत सकारात्मक दिव्य तरंगें निकलती हैं। इस दौरान प्रधानाचार्या पूनम रॉयल, रेनू, मीनाक्षी आदि मौजूद रहे।