मेरठी किस्सा ------------
जब जन आंदोलन बना था हाईकोर्ट बेंच का मुद्दा
मेरठ। पश्चिम उप्र में हाईकोर्ट बेंच के मुद्दे पर खड़ा हुआ 1989-90 में जन आंदोलन आज भी याद किया जाता है। वजह यह आंदोलन देहरादून से पैदल मार्च के रूप में शुरू हुआ था। मार्च में शामिल लोग लगभग 20 दिन पैदल यात्रा करके नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा को ज्ञापन दिया गया था। मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे जगदीश सिरोही और नरेन्द्र पाल सिंह ने आंदोलन की भूमिका तैयार की थी। इसमें संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष ओपी खन्ना, विनोद पुनेठा, गोपाल अग्रवाल सहित काफी व्यापारी नेताओं ने बड़ी भूमिका निभायी थी। देहरादून से शुरू हुए वकील और व्यापारियों के संयुक्त आंदोलन में शामिल लोगों का प्रत्येक शहर में स्वागत होता था। रात्रि विश्राम के समय सभा आयोजित की जाती थी। यह आंदोलन वकीलों तक नहीं सीमित रहा, बल्कि जन आंदोलन बन गया था। नरेन्द्र पाल सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में आंदोलन की शुरूआत की गई थी। पैदल मार्च दिल्ली पहुंचते पहुंचते जन सैलाब उमड़ गया था। गजेन्द्र पाल सिंह एडवोकेट की भी भूमिका रही थी। राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा को ज्ञापन सौंपने के लिए अधिवक्ता और व्यापारियों का एक प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति भवन में अंदर गए थे। राष्ट्रपति ने प्रतिनिधि मंडल के साथ काफी देर वार्ता की थी।