शरीर के सम्मुख आत्मा को धर्म का भोजन दें : विज्ञानमती माता
अमर उजाला ब्यूरो
हस्तिनापुर। दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में शांतिधारा अशोक जैन, राजेंद्र जैन ने किया। विराजमान आर्यिका 105 विज्ञानमती माता जी ने कहा कि बिना भोजन के शरीर शिथिल हो जाता हैं अपना काम भी नहीं कर पाता है और यदि दीर्घ काल तक भोजन ना मिले तो शरीर नष्ट भी हो जाता है। इस बात को सब लोग भली भांति जानते हैं। आत्मा का भोजन दिए बिना आत्मिक आनंद की अनुभूति नहीं हो सकती है धर्म ध्यान करने के लिए शरीर की परम आवश्यकता है। अत: आत्मा को भी नित्य भोजन देना चाहिए। कार्यक्रम में अंजू जैन, शांति जैन, उमा जैन, आशा जैन, ममता जैन, चक्रेश जैन, सुुशीला जैन, सरला जैन, स्वर्णलता जैन, विमला जैन, आसीमा जैन, संतोष जैन, कोशल जैन, मंजू जैन आदि सम्मलित रहे। पं. आशीष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई। 38वें दिन 140 परिवारों द्वारा विधान किया गया।