सरधना। मोहल्ला सराय अफगनान में शनिवार रात मुशायरे का आयोजन हुआ। मुशायरे की अध्यक्षता अब्दुल गफूर कमर साहब ने की। मुशायरे का संचालन आशिक महल कवि ने की। फुरकान अहमद फुरकान ने नाते पाक पढ़कर मुशायरे का आगाज किया। शायर इरशाद अली ने कहा कि सफीना है भंवर में करो असआर की बातें, खुदा के वास्ते छोड़ो लबों पर रुखसार की बातें। जनाब वकार अहमद ने कहा कि वजूद तेरा है मिट्टी के बस खिलौने सा, जरा सी चोट लगेगी तो टूट जाएगा। निसार अहमद फलावदी ने पढ़ा, परवरदिगार मुझको बनाना था मौलवी, शायर बना के क्यों मेरी मिट्टी खराब की। डॉ. नसीम सरधनवी ने पढ़ा, बेटा तू जाकर गांव से महलों में बस गया, मां बाप हैं कि टूटे मकानों में रह गए। शफीक अहमद शफीक ने पढ़ा, हुजरो में बैठने से ना बनेगी कोई बात, बाहर तुम्हें निकलना पड़ेगा नकाब से। शायर याकूब मौसीन ने शहरों में कहा, वतन की आबरू का यम उन्हीं के दम से है, शहीद होकर वतन का जो नाम करते हैं।