ड्रिप इरिगेशन से ही बचेगी भविष्य में गन्ने की खेती
- नंगलामल शुगर मिल के सहयोग से गन्ना और उद्यान विभाग ने चौधरी चरण सिंह विवि में की कार्यशाला
- कार्यशाला में आए किसानों को दी ड्रिप इरिगेशन की जानकारी, लगाए कृषि उत्पादों के स्टाल
मेरठ। लगातार घटते भूजल से चिंतित कृषि वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों ने ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) को ही भविष्य की खेती करार दिया। बृहस्पतिवार को इस विषय पर नंगलामल शुगर मिल ने गन्ना विकास विभाग और उद्यान विभाग के साथ चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कार्यशाला की। कार्यशाला में आए किसानों को टपक सिंचाई विधि से न केवल अवगत कराया बल्कि टपक सिंचाई उपकरणों और तकनीक का प्रदर्शन भी दिखाया। उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र हरपाल सिंह ने कहा कि गन्ना किसान गन्ने की बुआई प्राय: 1.20 मीटर से लेकर 1.50 मीटर की दूरी पर करते हैं। इसी दूरी के अनुसार ड्रिप सिंचाई करना उचित रहता है। सिंह ने कहा कि ‘पर ड्राप मोर क्राप’ योजना एवं हर खेत को पानी योजना के अंतर्गत प्रदेश के गन्ना किसानों में ड्रिप सिंचाई को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यान विभाग द्वारा आवंटित लक्ष्यों के सापेक्ष गन्ना विभाग द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों हेतु (बीपीएल) 80 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों हेतु 90 फीसदी अनुदान मिलता है। उप निदेशक उद्यान पंकज कुमार ने बताया कि ड्रिप सिंचाई संयंत्र की स्थापना हेतु सामान्य लघु सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत और सामान्य किसानों को 45 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है। किसानों का चयन पारदर्शी चयन प्रक्रिया के अंतर्गत सेवा के वेब पोर्टल डब्लूडब्लूडब्लू डॉट यूपीएग्री डॉट कॉम पर ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। कार्यशाला को नंगलामल मिल के जीएम केन एलडी शर्मा, वाईडी शर्मा, जयवीर सिंह ने भी अपने विचार रखते हुए महती जानकारी दी। योजना का लाभ उठा रहे किसानोें सत्यप्रकाश तोमर, जयकरण सिंह, सत्यपाल सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए। इन किसानों को पुरस्कृत भी किया गया। कार्यशाला में इफको, नेटाफिम, धानुका द्वारा प्रदर्शनी स्टालों पर अपने उत्पादों की जानकारी दी।
ये होता है ड्रिप इरिगेशन का फायदा
- पानी की बचत 30-35 फीसदी
- उपज बढ़ोतरी 20-25 प्रतिशत
- भूमि संरक्षण में मदद मिलती है
- इसके माध्यम से फर्टीगेशन अधिक होता है और टपक सिंचाईं के साथ उर्वरकों का उपयोग कम होता है
- उर्वरक उपयोग गन्ने की जड़ों के पास जाने से गन्ने की लाइनों के मध्य खरपतवार नहीं होते