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Mau News: नई सोच के साथ समाज का हित कर रहे युवा

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उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए। स्वामी विवेकानंद का यह ध्येय वाक्य जिले के कुछ युवाओं के लिए जीवन का अहम हिस्सा बन गई है। जो अलग-अलग सोच लिए समाज के हित में जुटे हैं। 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती पर अमर उजाला ऐसे ही युवाओं से रूबरू करा रहा है, जो अपने काम को काफी समय से स्वामी विवेकानंद के बताए सिद्धांत पर उसे करते आ रहे है।
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हर घंटे पर फाटक बंद होने पर समाजसेवी ने बनाई योजना
नगर के किसी बड़ी समस्या की बात आए तो उसमें सबसे पहले नगर की बाल निकेतन रेलवे क्रॉसिंग पर दिन भर लगने वाले जाम की समस्या प्रमुख है। मऊ जंक्शन से गुजरने वाली जोड़ी ट्रेनों के चलते हर घंटे में कम से कम एक बार बंद होने वाले इस फाटक पर जाम की समस्या न हो। इसके लिए नगर के सदर बाजार निवासी तथा समाजसेवी दीपक जैन ने यूट्यूब पर चैनल बनाया है। जो कि आज हजारों नगरवासियों को फाटक बंद होने की पूर्व ही सूचना देकर उन्हें जाम की समस्या से निजात दिला रही है। दरअसल इसमें फाटक के बंद होने की लोकेशन लाइव रहती है। ऐसे में कोई भी इसे मोबाइल पर देखकर अपनी सुविधा के हिसाब से दूसरा आसान रास्ता चुन रहा है या ट्रैफिक क्लियर/फाटक खुले होने पर अपनी यात्रा शुरू कर रहा है। दीपक ने बताया कि दो वर्षों से इस समस्या को देख रहे थे। बताया कि सीसीटीवी कैमरे तथा एलईडी बोर्ड का व्यसाय होने के चलते उन्होंने इस समस्या को लेकर अपने स्टॉफ इंजीनियर विशाल वर्मा से साझा किया गया। जिसके बाद 11 अप्रैल 2022 को उन्होंने सरल सॉल्यूशन लाइव यूट्यूब चैनल बनाया। इसके तहत फाटक के दूसरी तरफ दक्षिणेश्वर मंदिर पर एक सीसीटीवी कैमरा लगाया है। यहां से रेलवे फाटक के बंद होने की पल पल की लाइव टेलीकास्ट चैनल पर की जाती है। दीपक बताते है कि इस काम को सुबह दस बजे से शाम आठ बजे तक उनके साथी विशाल अपनी टीम के साथ करते है। दीपक बताते हैं कि इस सेटअप के पीछे उनका करीब चार लाख रुपया खर्च हुआ है। वहीं लैपटॉप के चालू होने तथा एक नेटवर्क इंजीनियर तथा ऑपरेटर के बैठने के साथ हाई स्पीड इंटरनेट सर्विस के साथ इलेक्ट्रिक सॉफ्टवेयर के चलते प्रतिदिन दो हजार रुपये खर्च हो रहा है।
पर्यावरण सरंक्षण को लेकर शैलेन्द्र जगा रहे है अलख
पुरानी तहसील निवासी और पेशे से शासकीय शिक्षक शैलेंद्र यादव आज जिले में एक प्रसिद्ध पर्यावरणविद हैं। पांच सितंबर 2020 से इनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अनोखा प्रयास किया गया। इसके तहत ये प्रतिदिन सुबह उठने के बाद एक पौधा स्वयं खरीदकर किसी न किसी को उपहार देते हैं। पौधा देने का यह क्रम बीते 879 दिन से लागतर एक दिन का नागा किए बिना जारी है। शैलेंद्र के इस कार्य को लेकर शुरू में लोगों ने कोई खास तव्वजो न देते हुए उपहास उड़ाया था, लेकिन उनके इस काम में यह परेशानी रुकावट बनने के बजाय उन्हें और मजबूत बनाती गई। आज जिले के अलावा बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ सहित अन्य जिले में इनके इस कार्य की सराहना की जाती है।
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स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर जरुरतमंदों की कर रहे मदद:
नगर के ब्रम्हस्थान निवासी अनुज पांडेय पुत्र कन्हैया पांडेय तथा रितेश राय पुत्र मनोज राय स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर छठीं कक्षा से 12वीं के जरूरतमंद मेधावी बच्चों को बुक, कॉपी उपलब्ध करा रहे हैं। कोरोना संक्रमण काल में भी अपना योगदान दिया। एक साथ पढ़ने वाले दोनों दोस्त वर्तमान में घोसी तहसील के बड़रांव ब्लाक में आसपास बसे दो गांवों के परिषदीय विद्यालय में बतौर सहायक शिक्षक तैनात हैं। बीएचयू से उच्च शिक्षा हासिल कर शिक्षक बने अनुज ने बताया कि पढ़ाई के दौरान से जरूरतमंदों की मदद करते रहे हैं। बाद में सहायक अध्यापक की नौकरी मिलने पर भी जारी है। जरूरतमंद मेधावी छात्रों की मदद के लिए 2019 से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भोजन का पैकेट बनाकर बांटा। बच्चों के लिए पुस्तकों के साथ सितंबर 2018 में बीटीसी करने के बाद दोनों ने अपनी पाकेट मनी से स्टेशनरी का सामान खरीदना शुरू किया। बताया कि वर्ष 2019 से अब तक 300 से अधिक बच्चों को चिंहित कर नि:शुल्क किताबें वितरित की। अनुज तथा रितेश बताते हैं कि उनके द्वारा गरीब मेधावी बच्चों के लिए नि:शुल्क कोचिंग दी जा रही है। ताकि गरीब बच्चे भी उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला पा सकें।
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