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Mau News: जिले में आज मनाया जाएगा विश्व होमियोपैथिक दिवस

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कोरोनाकाल में होमियोपैथिक दवाओं ने कई लोगों को नई जिंदगी दीं। दुनिया भर में होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति चर्चा के केंद्र में रही। आज विश्व में लोग होमियोपैथी दवाओं पर भरोसा कर रहे हैं। विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करवा रहे हैं। होमियोपैथिक की खासियत यह है कि इसमें दुष्परिणाम की आशंका कम होती है। इस चिकित्सा पद्धति की खोज 19वीं शताब्दी में जर्मन चिकित्सक डॉ. सैमुअल हैनिमैन ने की थी। इसलिए उनकी जयंती (10 अप्रैल) को होमियोपैथिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिला राजकीय होमियोपैथिक चिकित्सालय की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नम्रता श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. हैनीमैन शरीर पर दुष्प्रभाव डालने वाली चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ थे। उन्होंने शून्य दुष्परिणाम वाली चिकित्सा पद्धति की खोज में जीवन अर्पित कर दिया। गहन शोध के बाद होमियोपैथिक को ईजाद किया। चिकित्साधिकारी ने कहा कि डॉ़ हैनीमैन ने होमियोपैथी के रूप में मानवता को अमृत कलश दिया है। वह अनादिकाल तक पीड़ितों की सेवा करती रहेंगी। उन्होंने बताया कि होमियाेपैथिक दवाओं का दाम कम होता है। इसका सेवन आसान है। यह सहज ही उपलब्ध होता है। कोविड काल में भी इसकी उपयोगिता सामने आई है। आयुष्मान भारत में होमियोपैथिक की भूमिका है।
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