कलेक्ट्रेट पर मांगों को लेकर प्रदर्शन करते भाकपा माले के कार्यकर्ता।संवाद
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मऊ।खेत मजदूर संगठनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा, भाकपा (माले) ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। साथ ही राष्ट्रपति को संबोधित 22 सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। इस मौके पर भाकपा माले के जिला सचिव बसंत कुमार ने कहा कि करोना महामारी में मोदी सरकार की दुर्व्यवस्था से बदहाल अर्थव्यवस्था ने ग्रामीण मजदूरों के जीवन को संकट में डाल दिया है। शहरों से विस्थापित प्रवासी मजदूर काम की तलाश में गांव दर गांव भटकते रहे।गांव में आए प्रवासी मजदूरों को परिवारों का पेट भरने के लिए पुन: पलायन करना पड़ा। गरीबों,दलितों, महिलाओं के उत्पीड़न-दमन का राज्य बन गया है। संप्रदायिक नफरत का जहर फैलाया जा रहा है गरीबों मजदूरों के रोजी- रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ ,बढ़ती महंगाई, बेहतर कानून व्यवस्था के सवालों से पीछे हटते हुए भाजपा सरकार धार्मिक उन्माद और संप्रदायिक नफरत की राजनीति को बढ़ावा दे रही है। देश की जेलों में सबसे ज्यादा आदिवासी गरीब बंद है और अपने छूटने के इंतजार में तिल तिल कर जेलों में दम तोड़ रहे हैं। मोदी सरकार देश के खेती-किसानी को भी देश के कारपोरेट घरानों को सौंप देना चाह रही हैं जिसके खिलाफ देश के किसान-मजदूर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। किसान मजदूर ,छात्र ,नौजवानो की गोलबंदी और ताकत से ही गरीब, मजदूर, किसान विरोधी सरकार को शिकस्त देना होगा। प्रदर्शन में शिवमूरत गुप्ता, रामबली राजभर, साधु यादव, रामबदन, जंग बहादुर ,अशोक, फेंकू राजभर, दुर्ग विजय आदि शामिल रहे।