मऊ। कोरोना काल में नान कोविड मरीजों को परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। प्रसव के लिए निजी अस्पताल भर्ती करने से इंकार कर रहे हैं। जिला महिला अस्पताल में कोरोना जांच के बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जा रहा है। संक्रमित होने पर उन्हें रेफर कर दिया जा रहा है। अगर किसी निजी अस्पताल में प्रसव कराया भी जा रहा है तो मनमानी शुल्क वसूला जा रहा है। जिले में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। संक्रमण के चलते सभी निजी अस्पताल गर्भवती महिलाओं को भर्ती नहीं कर रहे हैं। यह स्थिति जिले के साथ बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ की भी है। स्थानीय जिला महिला अस्पताल में तैनात कई महिला चिकित्सकों के संक्रमित होने से स्थिति ओर बदतर हो गई है। जिले के तीन बड़े निजी अस्पतालों के कोविड अस्पताल में शामिल होने के चलते यह समस्या और विकट हो गई है। महिला अस्पताल में मरीजों के पहुंचने पर उन्हें जांच के बाद भर्ती तो किया जा रहा है लेकिन संक्रमित उन्हें एल-2 या एल-3 अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जा रहा है। वहीं सामान्य गर्भवती महिलाओं की डिलेवरी कराई जा रही है। लेकिन यह संख्या 10 से कम है। बलिया के नरई गांव निवासी सत्येंद्र शर्मा अपनी गर्भवती पत्नी सुनीता विश्वकर्मा का उपचार शहर के एक निजी अस्पताल में करा रहे थे। कुछ दिक्कत होने पर वो पत्नी को दिखाने के लिए मऊ आए। यहां जांच करने पर वो तथा पत्नी दोनों पॉजिटिव निकले। इसके बाद अस्पताल ने गर्भवती महिला का उपचार करने से इंकार ही नहीं किया, दंपती तत्काल अस्पताल से बाहर कर दिया। मधुबन के दुबारी देवरांच के विशुनपुरा निवासी सुनीता पत्नी धर्मपाल को प्रसव पीड़ा हुई, पत्नी को लेकर धर्मपाल जिला महिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन कोई मरीज को अटेंड करने को तैयार नहीं हुआ। नतीजतन वे मरीज को लेकर वापस लौटे, साथ ही किसी छोटे अस्पताल पर जाकर प्रसव कराए।