मऊ। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट हर्ष अग्रवाल ने धमकी और हत्या के प्रयास के मामले में नामजद दो आरोपियों में सुनवाई के बाद एक महिला को दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश ने महिला की उम्र को देखते हुए उसे परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए एक माह तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया।
एक आरोपी की मौत हो जाने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। मामला चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, रसूलपुर गांव निवासी चंद्रभान यादव की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। वादिनी का कथन है कि 30 जून 2005 की रात 8 बजे आरोपीगण उसके घर पर आए तथा लाइसेंस असलहे से जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया।
पुलिस ने विवेचना के बाद रसूलपुर गांव निवासी राम अवध पुत्र दुखरन और धनमाती देवी पत्नी रामअवध के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक सत्येंद्र नाथ राय और अखिलेश कुमार सिंह ने कुल तीन गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद धनमाती देवी को धमकी देने के मामले में दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उसे एक वर्ष का साधारण कारावास की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश ने महिला को उसकी उम्र को देखते हुए परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए एक माह तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया। आरोपी रामअवध की मौत हो जाने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।