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Mau News: पति को पीटने में पत्नी और उसके दो रिश्तेदार दोषी, तीन साल की सजा

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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 1 अशोक कुमार ने पति को पीटकर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में पत्नी और उसके रिश्तेदारों को दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों को 3-3 वर्ष कैद के साथ ढाई- ढाई हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 2-2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। हालांकि कोर्ट ने तीनों को उनकी उम्र को देखते हुए परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए 6-6 तक शांति कायम रखने और सदाचारी बने रहने की हिदायत देते हुए छोड़ दिया। अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा कि मामला पति-पत्नी के मध्य गहरे वैचारिक मतभेद की परिणति है। दंपती की चार संताने हैं, जिनमें 1 पुत्र और 3 पुत्रियां हैं। इनका पालन-पोषण, शिक्षा, देखभाल अभियुक्ता प्रेमलता करती हैं। इसलिए उन्हें परीवीक्षा अधिनियम का लाभ नहीं दिया गया तो, एक तरफ पति-पत्नी के संबंध में दूरी आएगी, वहीं पुत्रियों का भविष्य अंधकारमय व असुरक्षित हो जाएगा।
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मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार चौकीदार घूरा यादव पुत्र बिरजू यादव की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। वादी का कहना था कि 14 फरवरी 2015 को जमालपुर में आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज थाना क्षेत्र के सियरहा गांव निवासी उमेश चंद्र राय अपनी पत्नी रानीपुर थाना क्षेत्र के अरैला गांव निवासी प्रेमलता राय पुत्री दिलीप राय और बच्चों से मुलाकात करने आया था। प्रेमलता राय पुत्री दिलीप राय, उपेंद्र राय पुत्र दिलीप राय और श्रीराम राय पुत्र रामबदन राय ने मिलकर उमेश चंद्र की पिटाई कर दी, जिससे उसे गंभीर चोटें आई। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए प्रभारी डीजीसी फौजदारी अजय कुमार सिंह और एडीजीसी फौजदारी नंदलाल भारती ने 10 गवाहों को पेश किया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण प्रेमलता राय, उपेंद्र राय और श्रीराम राय को मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने व धमकी देने के मामले में दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों को धारा 325 के तहत 3-3 वर्ष कैद के साथी ढाई-ढाई हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वही धारा 506 के तहत छह-छह माह की सजा का फैसला सुनाया। साथ ही अर्थदंड की 75 प्रतिशत धनराशि पीड़ित उमेश चंद राय को प्रतिकर स्वरूप देने का आदेश दिया। एडीजे ने अपने आदेश में लिखा की दोषी प्रेमलता राय, उपेंद्र राय और श्रीराम राय को उनकी उम्र व परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें धारा 4 परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए छोड़ दिया।
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