मऊ। घोसी उप चुनाव के रण का आज परिणाम आएगा। पांच सितंबर को मतदान में चार लाख से अधिक वोटरों में से लगभग 50 फीसदी ने मतदान किया था। भाजपा के दारा सिंह चौहान और सपा के सुधाकर सिंह के बीच मुकाबला होने से उप चुनाव रोमांचक रहा। दोनों पार्टियों के दिग्गजों ने चुनावी मैदान में जमकर पसीना बहाया। बीते पांच सितंबर की सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक 239 मतदान केंद्रों के 455 बूथों पर मतदान हुआ। 50.23 फीसदी मतदान हुआ था। जो कि बीते 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में 56.87 से छह फीसदी से अधिक कम था। इसी सीट पर एक वर्ष पहले आम विधानसभा चुनाव को लेकर जितना उत्साह नहीं था, उतना ही उत्साह मतदाताओं में उप चुनाव को लेकर भी था। पिछले वर्ष सभी प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे थे। वहीं इस बार यह चुनाव आईएनडीआईए (इंडिया) और एनडीए बनाम बनकर रह गया था।
सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह को समर्थन देते हुए कांग्रेस, आप, सुहेलदेव स्वाभीमान पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे। सपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार भी इन दलाें के पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं ने किया था। भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में सुभासपा, अपना दल, निषाद पार्टी का समर्थन रहा। इसको लेकर घोसी की जनता में काफी उत्साह देखने को मिला, लेकिन मतदान केंद्रों पर केवल आधे ही मतदाता मतदान करने पहुंचे। इससे वोटों की गणित उलझी।
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बसपा मतदाताओं ने उलझाया
उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। किसी के समर्थन में भी पार्टी नहीं उतरी। चुनाव के पहले बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने नोटा दबाने की बात कही थी। ऐसे में अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं के एक लाख वोटों को लेकर दोनों खेमों में गुणा-गणित होती रही।
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उपचुनाव में हर बार गिरता रहा है मतदान मऊ। उप चुनाव को लेकर जिस तरह से भाजपा-सपा प्रत्याशी के पक्ष में दोनों पार्टी ने प्रचार को लेकर रणनीति तैयार की थी। उससे मतदान का ग्राफ बढ़ने की संभावना थी, लेकिन इस बार भी घोसी का मतदान प्रतिशत 60 फीसदी के नीचे ही रहा। बीते वर्ष 2022 में इस सीट पर 56.87 फीसदी मतदान हुआ था। वर्ष 2019 में हुए उपचुनाव में 51.93 मतदान हुआ। 2017 के आम विधानसभा चुनाव में 58.89 मतदान हुआ था। यानी 2017 से पांच सितंबर 2023 तक हुए चार बार विधानसभा चुनाव हुए। एक बार भी घोसी में 60 फीसदी का मतदान नहीं हुआ। इस दौरान उपचुनाव को लेकर भले ही मतदाताओं ने उत्साह दिखाया, लेकिन यह उत्साह मतदान में तब्दील नहीं हो सका।