पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर तो वाहन फर्राटा से दौड़ रहे हैं। लेकिन एक्सप्रेस वे निर्माण के दौरान 38 क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने की सुध लेने की जहमत नहीं ली जा सकी है। जबकि शासन का आदेश था कि एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए जिन सड़कों का यूपीडा इस्तेमाल करेगी, उसकी मरम्मत भी वही कराएगी। हालत यह है कि इन गांवों के लोग जलालत झेलने को विवश हैं। लोक निर्माण विभाग ने बदहाल 38 सड़कों पर मरम्मत कार्य के लिए यूपीडा से नौ करोड़ रुपये का डिमांड किया है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण 2018-19 में शुरू हुआ था। पिपरीड़ीह में यूपीडा का प्लांट लगा था। निर्माण के लिए ओवरलोड मिट्टी लदे डंपर, कोयले की राख लादकर आते-जाते रहे। ऐसे में ओवरलोड ट्रकों से सरसेना-सलाहाबाद मार्ग, बढुआगोदाम-ब्राह्मणपुरा मार्ग, मुहम्मदाबादगोहना चिरैयाकोट करतारीपुर, करहां, भटमीला, चकभीखा मार्ग, पिपरीडीह-नखतपुर मार्ग, हथिनी-सरवां मार्ग, खुरहट-रानीपुर संपर्क मार्ग 38 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद न तो यूपीडा और न ही लोक निर्माण विभाग ने सुध ली। बदहाल सड़कों को लेकर परेशान ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। जबकि शासन का आदेश था कि एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए जिन सड़कों का यूपीडा इस्तेमाल करेगी, उसकी मरम्मत भी वही कराएगी। तमाम शिकायतों को संज्ञान में लेेते हुए शासन के फरमान पर यूपीडा तथा लोक निर्माण विभाग ने संयुक्त रूप से सर्वे किया था। यूपीडा की तरफ से बदहाल 38 सड़कों का निर्माण कार्य कराना था। एक दो सड़कों पर मरम्मत कार्य कराया, लेकिन कुछ दिनों के बाद सड़क जस की तस हो गई। शिकायत मिलने पर यूपीडा ने लोक निर्माण विभाग को मरम्मत कराने का जिम्मा सौंप दिया, लेकिन यूपीडा ने अभी तक बजट जारी नहीं किया है। इसके चलते मरम्मत कार्य शुरू ही नहीं हो सका है। कब बजट जारी होगा यह बताने के लिए आला अधिकारी तैयार नहीं हैं।
इस संबंध में परदहां ब्लाॅक क्षेत्र के अशोक कुमार यादव, रामनारायण मौर्य, शिवबचन प्रसाद, रविंद्र कुशवाहा का कहना था कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे निर्माण के दौरान भारी भरकम गाड़ियों से मिट्टी लादकर आवागमन करने से सड़कें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जिसके कारण इन पर आवागमन दूभर हो गया है। शिकायत करने के बाद भी मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है।