दोहरीघाट। सरयू नदी का जलस्तर स्थिर हो जाने के बाद भी उग्र रूप धारण करने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों में भय बना हुआ है। तटवर्ती इलाकों के सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न होने से चारे का संकट खड़ा हो गया है। नदी के बैकरोलिंग करते हुए लहरें भारत माता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही हैं। इसके चलते ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। सरयू नदी का जलस्तर स्थिर रहने से तटवर्ती इलाके के लोग राहत की सांस ले रहे हैं, लेकिन नदी के बैकरोलिंग करने से कहर बरपाने की चिंता लोगों को खाए जा रही है।
नदी की प्रलयकारी लहरों के तट से टकराने के कारण नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, जानकी घाट, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, डीह बाबा का मंदिर, हनुमान मंदिर अभी भी खतरे में है। नदी के तटवर्ती इलाकों में पानी घुस जाने से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होने से किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है। अगर कई दिन तक पानी जमा रहा तो गन्ने और धान की फसल बर्बाद हो सकती है। धनौली लोहड़ा, नवली चिउटीडाड़, रिंग बंधा, बीबीपुर बेलोली बंधे पर पानी का दबाव बना हुआ है। गौरीशंकर घाट पर मंगलवार को नदी का जलस्तर 70.40 मीटर रहा। जबकि सोमवार को जलस्तर 70. 40 मीटर था। नदी अब खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।