मऊ। कोरोना के चलते लाकडाउन में ट्रेनों का परिचालन बंद होने से वेंडरों का धंधा बंद हो गया था। अब कोविड स्पेशल ट्रेनें चलने से वेंडरों को कुछ राहत तो मिली है लेकिन अभी खास लाभ नहीं हो रहा है। वेंडरों का कहना है कि पैसेंजर ट्रेनों को परिचालन शुरू हो तो आय बढ़ेगी। कोरोना संक्रमण से पहले मऊ जंक्शन से प्रतिदिन 23 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन होता था जिसमें सात जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें शामिल थीं। ट्रेनों के परिचालन से मऊ जंक्शन के चारों प्लेटफार्म पर संचालित छह स्टॉल, चार ठेला तथा एक भोजनालय संचालक तथा इसमें कार्य करने वाले 30 से ज्यादा कर्मचारी अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। मार्च में कोरोना संक्रमण के चलते ट्रेनों को संचालन बंद कर दिया गया। जून में मऊ जंक्शन से पहले चरण में साबरमती, ताप्ती गंगा, सरयू यमुना एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू किया। इसके बाद दूसरे चार चरण में कृषक एक्सप्रेस, लिच्छवी, दादर, गोदान, पूर्वांचल एक्सप्रेस, सहित आठ ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। इससे प्लेटफार्म के स्टालों पर यात्रियों की चहल पहल शुरू हो चुकी है लेकिन अभी अपेक्षित लाभ नहीं हो रहा है। प्लेटफार्म दो 2 पर स्टॉल लगाने वाले राजू यादव ने बताया कि वर्तमान में केवल 20 फीसदी ट्रेनें चलने से अधिक लाभ नहीं हो रहा है। वर्तमान में 25 फीसदी ब्रिकी हो रही है। प्लेटफार्म एक ठेला लगाने वाले रामू मिश्रा ने बताया कि कि ट्रेनों के चलने से व्यापार शुरू हो गया, लेकिन पैसेंजर ट्रेनों का संचालन न होने से यह गति नहीं पकड़ पा रहा है। कोरोना संक्रमण से पूर्व एक हजार से ज्यादा की ब्रिकी होती थी, लेकिन अब यह 300 से 400 रुपये तक सिमट गई है। कई यात्री अब भी बाहर खानेपीने से परहेज कर रहे हैं।