मऊ। युवा बेरोजगारों को प्रधानमंत्री रोजगार योजना का लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा। वित्तीय सत्र बीतने में 47 दिन बचे हैं। जिला उद्योग केंद्र की तरफ से 111 पत्रावलियां विभिन्न बैंकों में भेजी गई। लेकिन बैंकों ने सिर्फ 33 ही स्वीकृत कीं। 18 को वापस कर दिया जबकि 60 पत्रावलियां पेंडिंग है। नियम के तहत 15 दिनों के अंदर पत्रावलियों का निस्तारण करने का प्रावधान है। ऐसे में बेरोजगार युवक बैंकों का चक्कर काट रहे और अधिकारी लापरवाह बने हैं। शहरी तथा ग्रामीण इलाकों के बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम शुरू किया गया है। योजना के तहत अधिकतम प्रोजेक्ट पर 10 लाख का लोन दिया जाता है। शासन का योजना का 34 लाभार्थियों का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए 1.2 करोड़ का बजट जारी किया गया है।योजना के तहत लोन पर 15 से 35 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। विभाग के पास योजना के तहत 213 आवेदन आए। चयन प्रक्रिया में 111 अभ्यर्थी योग्य पाए गए। विभाग ने चयनित लाभार्थियों की पत्रावलियां विभिन्न बैंकों में भेजी गई। लेकिन अब तक 33 पत्रावली ही स्वीकृत की जा सकी है। 60 पत्रावलियां पेडिंग में है। नियम के तहत बैंकों को 15 दिन के अंदर ही सरकारी योजनाओं के तहत आई पत्रावलियों का निस्तारण करना होता है। जबकि वित्तीय वर्ष बीतने में 47 दिन ही शेष हैं। गत वर्ष 2018-19 में योजना के तहत अभ्यर्थियों की फाइलें विभिन्न बैंकों को भेजी गई। लेकिन वित्तीय वर्ष तक बैंकों से आठ फाइलें ही स्वीकृत की गई। हालत यह रहा है कि 66.60 लाख का बजट वापस चला गया। लाभार्थियों को योजना से वंचित होने का डर सताने लगा है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राजेश रोमन कहते हैं कि लंबित पत्रावलियों का निस्तारण करने के लिए एलडीएम को पत्र भेजा गया है। वहीं एलडीएम मनोज कुमार वर्मा का कहना है कि सरकारी योजनाओं से संबंधित पत्रावलियों को संबंधित बैंकों को 15 दिन के अंदर निस्तारण करने का आदेश दिया गया है। लापरवाही मिलने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।