प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) भर्ती बोर्ड को आरक्षी भर्ती में हड्डी रोग की विसंगतियों के आधार पर मेडिकल परीक्षा में अयोग्य घोषित अभ्यर्थी के हड्डी रोग की एक प्रोफेसर समेत दो सदस्यीय विशेषज्ञ समिति से फिर से जांच कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जांच समिति को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में 10 अप्रैल तक अदालत में पेश करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने मऊ के अभ्यर्थी उपेंद्र कुमार की ओर से दाखिल स्पेशल अपील पर अधिवक्ता सुनील यादव को सुनने के बाद दिया।
मामला सशत्र सीमा बल में विभिन्न ट्रेड के लिए कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया 2020 का है। याची ने कांस्टेबल पद के लिए अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी के रूप में आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के सभी चरणों में सफल रहे याची को नेत्र रोग विशेषज्ञ समेत तीन डॉक्टरों की जांच समिति ने हड्डी रोग से जुड़ी विसंगति के आधार पर चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया था।
वहीं याची ने उन्ही विसंगतियों की जांच वाराणसी के बीएचयू सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में करवाई, तो उसमें वह फिट पाया गया। बीएचयू की ओर से जारी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसे एकल पीठ ने खारिज कर दिया था। याची ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता सुनील यादव ने दलील दी कि याची को नेत्र रोग विशेषज्ञ की राय पर हड्डी की विसंगतियों के आधार पर मेडिकल रूप से अनफिट किया गया है, जो विश्वसनीय नहीं हो सकती है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ की मेडिकल रिपोर्ट पर हड्डी रोग के विशेषज्ञ की राय नहीं ली गई, जबकि इस भर्ती में अपनाई जाने वाली चयन प्रक्रिया के नियमों में सुपर स्पेशलिटी डॉक्टर की राय लिए जाने का प्रावधान है। कोर्ट ने सशस्त्र सीमा बल के भर्ती कमांडेंट को हड्डी रोग के प्रोफेसर रैंक के डॉक्टरों की दो सदस्यीय समिति से याची की हड्डियों की पुनः जांच करवाते हुए जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अगली सुनवाई तक पेश करने का आदेश दिया है। इसके लिए याची को भर्ती बोर्ड को पांच हजार रुपये अदा करने होंगे। कोर्ट ने याची को एक सप्ताह में पांच हजार रुपये के साथ भर्ती कमांडेंट के समक्ष पेश होने का निर्देश भी दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।