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भगवान का दूसरा नाम ही सत्य

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कोपागंज ब्लाक के खुखुंदवा में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन प्रवचन देते गंगाचार्य महाराज।संवा - फोटो : MAU
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कोपागंज। खुखुंदवा में चल रही साप्ताहिक संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन काशी से पधारे आचार्य गंगाचार्य जी महराज ने कहा कि भगवान का दूसरा नाम ही सत्य है। सत्यनिष्ठ प्रेम के पुजारी भक्त भगवान के अति प्रिय होते हैं। कलियुग में कथा का आश्रय ही सच्चा सुख प्रदान करता है। कथा श्रवण करने से दुख और पाप मिट जाते हैं। भागवत कथा कलियुग का अमृत है और सभी दुखों की एक ही औषधि है। उन्होंने कहा कि भागवत अवरोध मिटाने वाली उत्तम अवसाद है। भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। भगवान शिव ने सुखदेव बनकर सारे संसार को भागवत सुनाई है। श्रोताओं को कर्मो का सार बताते हुए कहा कि अच्छे और बुरे कर्मो का फल भुगतना ही पड़ता है। उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह छह महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे थे। जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे थे तब वे सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया है ,जो मुझे इतने कष्ट सहन करना पड़ रहे है। उसी वक्त भगवान कृष्ण भीष्म पितामह के पास आते हैं। तब भीष्म पितामह कृष्ण से पूछते है कि मैंने ऐसे कौन से पाप किए हैं कि बाणों की शैय्या पर लेटा हूं पर प्राण नहीं निकल रहे है। तब भगवान कृष्ण ने भीष्म पितामह से कहा कि आप अपने पुराने जन्मों को याद करो और सोचो कि आपने कौन सा पाप किया है। भीष्म पितामह बहुत ज्ञानी थे। उन्होंने कृष्ण से कहा कि मैंने अपने पिछले जन्म में रत्तीभर भी पाप नहीं किया है। इस दौरान आयोजक अजीत कुमार पांडेय, अविनाश पांडेय, प्रदीप कुमार पांडेय, प्रशांत पांडेय, अंकित पांडेय शामिल रहे।
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