मऊ। मुंबई से लौट रहे प्रवासियों को ट्रक मालिकों ने पैसा वसूलने का जरिया बना लिया है। इतना ही नहीं मानमाफिक किराया लेने के बाद उन्हें गंतव्य तक न पहुंचा कर बीच में ही उतार दिया जा रहा। भूखे प्यासे यह प्रवासी किस तरह घर तक पहुंच रहे यह उनका दिल ही जान रहा। हालांकि ऐसे ट्रक मालिकों में कुछ रहमदिल भी निकले हैं जो बिना किराया लिए ही इन हालात के बारे प्रवासियों को इनके घर तक छोड़ दे रहे। मुंबई के अलग-अलग इलाकों में रहकर कपड़े धोने वाले दोहरीघाट ब्लाक के सियरही बरजला गावं के कुछ युवकों का रोजगार जब बंद हो गया और खाने के लाले पड़ने लगे तो इन्होंने एक ट्रक चालक से संपर्क कर मऊ तक पहुंचाने का अनुरोध किया। ट्रक चालक ने प्रत्येक व्यक्ति से तीन तीन हजार रुपये की दर से दो लाख 40 हजार रुपये किराया वसूला और 80 लोगों को ठूंस कर चल पड़ा। सियरही गांव निवासी राजू ने बताया कि 20 मार्च को मुंबई पहुंचा। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद लाकडाउन हो गया। गांव के कुछ युवकों के पास उसका खाना पीना कुछ दिन तक होता रहा। जब गांव के लोगों की भी कमाई बंद हो गई तो घर वह घर लौटने लगे। राजू भी गांव वालों के साथ तीन हजार देकर ट्रक पर सवार हो गया। चालक ने आठ मई को बिना तिरपाल के ही खुली ट्रक में पीछे से पटरा लगाकर 80 लोगों को ठूंस लिया। चालक ने सियरही के छह लोगों को जौनुपर के गौराबादशाहपुर बाजार में उतार दिया। वहां से गुजर रहे एक गिट्टी लदे ट्रक चालक से राजू तथा अन्य लोगों ने गांव तक पहुंचाने को कहा तो वह तैयार हो गया और10 मई को उन्हें घोसी पहुुुंचा दिया। राजू ने बताया कि ट्रक चालक ने उनसे यह कहते हुए पैसा लेने से इंकार कर दिया कि वह भी थोड़ा प्रवासियों की मदद कर ले रहा। घोसी में थर्मल स्क्रीनिंग के बाद इन्हें गांव के ही मातादीन यादव ने गांव के बाहर बने अपने मकान में शरण दिया। पांच दिन रहने के बाद ग्राम प्रधान ने उनसे कहा कि अब कोई बात नहीं, अपने घर चले जाओ । ग्राम प्रधान की बात मानकर 15 मई को ये लोग अपने घर चले गए और अब परिवार के साथ ही रहे हैं।