मऊ। जिले में चार दिनो में तीन नए कोरोना पाजीटिव मरीज मिलने से प्रशासन की नींद उड़ गई है। ऐसे में प्रवासियों के आने से जिले की आबोहवा दूषित हो गई। जिले में पहला कोरोना पाजीटिव मरीज 19 अप्रैल को कोपागंज में मिला था। हालांकि 28 दिनों तक तो सब कुछ ठीक चला। लेकिन प्रवासियों की आमद ने जिले की शांति में खलल डाल दिया। नतीजतन चार दिन में तीन कोरोना पाजीटिव मिलने से हड़कंप मच गया। 16 अप्रैल को अमर उजाला ने इस संबंध में खबर प्रकाशित भी किया था। मालूम हो कि 19 अप्रैल को कोपागंज के दोस्तपुरा मुहल्ले में मिला पहला कोराना पाजीटिव युवक सहारनपुर स्थित देवबंद का छात्र था। लॉक डाउन में छात्र जमात के साथ अपने घर लौटा था। मरीजों की संख्या न बढ़े इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़ाई और स्कैनिंग शुरू की गई थी। प्रशासन का प्रयास जारी रहा। अचानक सरकार ने गैर प्रांतों में फंसे मजदूरों को उनके घर भेजने की कवायद शुरु की। ऐसे में जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने ली। ऐसे में दूसरा मरीज 28 दिन बाद 14 मई को रानीपुर ब्लाक के चितबिसाव गांव में मिला, ट्रैवेल हिस्ट्री वह मुंबई से लौटा था। इसके तीसरे ही दिन16 मई को परदहां ब्लाक के अहिलाद गांव में एक और कोरोना पाजीटिव मरीज मिला। यह दिल्ली से लौटा था। अभी प्रशासन इसे लेकर हॉटस्पाट और अन्य व्यवस्थाओं की कवायद शुरू कर रहा था कि चौथा केस रविवार को मधुबन तहसील के मर्यादपुर बाजार में मिल गया। ऐसे में लगातार मिल रहे कोरोना पाजीटिव मरीज ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हालांकि दोस्तपुरा निवासी देवबंद का छात्र उपचार के दौरान ठीक हो चुका है। लेकिन तीसरे चरण के लॉक डाउन में 96 घंटे में कोरोना पॉजिटिव का यह तीसरा मामला प्रकाश में आया है। जो साबित करता है कि जिले की आबोहवा बाहर से आने वाले लोगों से दूषित हो रही।