सर तीन भाईयों ने मां को ठुकरा दिया। लेकिन मैं अपनी मां को अपने साथ रखता हूं। लेकिन बीते कई माह से इस बात को लेकर मेरी पत्नी मुझसे आए दिन झगड़ा करती है। कई बार समझाने की प्रयास किया लेकिन वह हर बार एक ही ताना मारती है कि तीन भाईयों ने मां को साथ नहीं रखा तो हम क्यों रखें। मैं मां को किसी भी हालत में अपने घर से बाहर नहीं निकाल सकता हूं, इसके चलते हमारा रिश्ता अलगाव तक पहुंच चुका है। यह बात रविवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित परिवार परामर्श की बैठक में पीड़ित ने कहीं। सदस्यों ने महिला से इस संबंध में बात की, जहां उसने अपनी सास को घर में रखने के चलते विवाद की बात स्वीकार की। इस पर ब्यूरो के सदस्यों ने महिला को अपनी सास को मां समझकर उसकी कद्र करने के साथ आपसी सौहार्द बनाकर रहने की सलाह दी गई। इससे पहले सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक चली बैठक में 42 मामले सामने आए, इसमें 12 का निस्तारण हुआ। वहीं चार दंपती गिले शिकवे भुलाकर साथ रहने को तैयार हुए।बैठक में अर्चना उपाध्याय, सर्वेश दुबे, शाहिद पैरिस, मौलवी अरशद प्रमुख रूप से मौजूद रहे।