मऊ। शहरों की तर्ज पर जिले के मॉडल ग्राम पंचायतों में घर से ई-रिक्शा से कचरा उठाने की योजना फेल होती नजर आ रही है। जबकि इसके लिए पंचायती राज विभाग ने तेजी से काम करने का दावा किया था। लेकिन एक दो ग्राम पंचायतों के अलावा कहीं भी ई-रिक्शा नहीं खरीदा गया है।
स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के पहले चरण में ई-रिक्शा के लिए 26 मॉडल ग्राम पंचायतों में 2022 में ही 41.60 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। इसमें एक ई-रिक्शा के लिए एक ग्राम पंचायत में 1.60 लाख रुपये दिए गए थे। जिससे गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों से कचरे की छंटनी करके आरआरसी सेंटर में पहुंचाकर उससे खाद बनाई जा सके। इसके लिए ग्राम पंचायत द्वारा महीने में एक बार हर घर और दुकानों से शुल्क वसूला जाना है।
इसके लिए ग्राम पंचायत सचिव और सहायक सचिव की जिम्मेदारी तय की गई है। कूड़ा इकट्ठा करने में किसी तरह की शिकायत के लिए एक विशेष नंबर जारी करने की योजना थी। आरआरसी सेंटर में पहुंचाने के बाद कचरे की छंटनी कर उससे खाद बनाई जाएगी। छंटनी के बाद निकले लोहा, मेटल, कांच, प्लास्टिक आदि और कंपोस्ट खाद बेचकर मिलने वाली धनराशि को ग्राम पंचायत बैंक खाते में जमा करना था। इससे हर माह रखे गए मजदूर, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को वेतन दिया जाना तय था। बची धनराशि से अन्य विकास कार्यों में उपयोग किया जाएगा। लेकिन गांवों में चारों ओर गंदगी फैली है, जाम पड़ी नालियां सफाई की गवाही दे रही हैं।
आरआरसी सेंटरों पर लगे हैं ताले
मऊ। जिले के 26 मॉडल गांवों में कूड़ा निस्तारण के लिए आरआरसी सेंटर का निर्माण कराया गया है। इसके लिए लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन अभी तक कहीं भी आरआरसी सेंटर शुरू नहीं हो सका है। अधिकांश पर ताले लटक रहे हैं। जब आरआरसी सेंटर में काम ही शुरू नहीं हुआ है तो ग्राम पंचायतें ई-रिक्शा क्यों खरीदेंगी।
योजना का क्रियान्वयन शासन की मंशा के अनुरूप कराया जाएगा। मामले की जांच कर गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - किरन वर्मा, जिला पंचायतराज अधिकारी, मऊ