मऊ। ग्रामीण मजदूर यूनियन के पदाधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केंद्र तथा प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीति से मजदूर वर्ग परेशान है। एक ओर सरकार खेती किसानी को बदहाली में धकेलकर ग्रामीण मजदूरों की रोटी पर हमला कर रही है। दूसरी ओर न तो ग्रामीण मजदूरों को गुजारे लायक मजदूरी मिल रही है और न ही पर्याप्त काम मिल रहा है। ऐसे में किसानों के साथ-साथ ग्रामीण मजदूरों की एक आबादी कर्ज जाल में फंस रही है। सरकार श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव कर रही है। फैक्ट्री कारखानों में अब 12-12 घंटे काम, रखो निकालो की नीति लागू हो रही है। ऐसे में इसका असर असंगठित क्षेत्र के ग्रामीण मजदूरों पर भी पड़ना तय है। अंत में ग्रामीण मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 500 रुपये प्रतिदिन करने, महिला मजदूरों को पुरूषों के समान वेतन देने, बीमार मजदूरों का मुफ्त इलाज, कार्यस्थल पर सुरक्षा, भट्ठा मजदूरों के लिए मुफ्त आवास, मनरेगा में 100 दिन काम देने अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देने, काम के लिए अक्षम मजदूरों को मासिक गुजारा भत्ता देने आदि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। प्रदर्शन करने वालों में ग्रामीण मजदूर यूनियन के अध्यक्ष रामजी सिंह, संजीव आदि शामिल रहे।