मऊ। अप्रैल में ही चढ़ते पारे का असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। मऊ में पारा 41 के पार चल रहा है। जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में गर्मी से प्रभावित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अस्पताल में रोजाना की ओपीडी में सर्वाधिक मरीजों में वायरल फीवर, टाइफाइड, मलेरिया, गैस्ट्रो डायरिया के हैं। जिला अस्पताल में आमतौर पर रोजाना 700 मरीजों का उपचार होता है। इधर, मौसम में बदलाव के बाद अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़कर 900 हो गई है।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अभी अस्पताल में आने वाले मरीजों में करीब 20 फीसदी मरीज मौसम में बदलाव से प्रभावित हैं। अस्पताल का काउंटर खुलने के बाद से पर्ची कटाने के लिए लंबी कतार लग रही है। चिकित्सक से परामर्श के लिए भी लोग चेंबर के बाहर इंतजार करते रहे। चिकित्सकों का कहना है कि चढ़ते पारे के कारण शरीर में पानी कमी से डिहाईड्रेशन हो रहा है। ऐसे में लोगों को नियमित रूप से पानी पीते रहना चाहिए। फिजिशियन डॉ. शैलेश कुशवाहा का कहना है कि घर में नमक, चीनी व पानी का घोल या ओआरएस का घोल पीने की सलाह दी। साथ में सलाद खाने की भी सलाह दी। यह मौसम संक्रामक बीमारियों के लिए संवेदनशील है। ऐसे में बुखार व उल्टी दस्त डायरिया के मरीज अधिक आ रहे हैं। इस मौसम में बासी भोजन व खुले में रखा भोजन का सेवन कतई न करें, सड़क पर खुले में बिक रहे कटे फल अथवा बर्फ पानी प्रयोग न करें। यह सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। बताया कि प्राकृतिक पेय पदार्थ जैसे नारियल पानी, ताजा गन्ने का रस, ठंडा दूध, नीबू पानी, आम पना का सेवन करते रहें। अपने आस-पास के तापमान को कम करने के लिए खुली और ठंडी जगहों का उपयोग करें। ढीले और सूती कपड़ों का उपयोग करें। धूप में बाहर निकलते समय टोपी, ग्लव्स, धूपी चश्मा लगाएं। फलों में संतरा, तरबूज, खीरा, सब्जी में लौकी, धनिया, पुदीना को आहार में शामिल करें। कोई भी परेशानी होने पर चिकित्सक से परामर्श के बाद ही दवा का सेंवन करें।
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जिला अस्पताल में सभी प्रकार कर दवाएं उपलब्ध है। जो भी ऐसे मरीज आ रहे है, उनको जांच के बाद दवा दी जा रही है। वायरल वाले मरीजाें का रक्त की जांच होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर उपचार किया जा रहा है।
-डॉ. धनंजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल