पति का यह धार्मिक, नैतिक और विधिक कर्तव्य है कि वह अपनी पत्नी की रक्षा व सुरक्षा करें। पति को मृतका को जलाकर मारने का दोषी पाया गया है। दोषी का यह कृृत्य अत्यंत क्रुरतापूर्ण एवं नृशंस है। यह टिप्पणी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक मिथिलेश कुमार तिवारी ने दहेज हत्या के मामले में सजा सुनाते हुए की। उन्होेंने तीन आरोपियों में पति सुनील चौहान को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रताड़ना के मामले में दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपए अर्थदंड लगाया।
उन्होंने दहेज मांगने के मामले में 1 वर्ष के कठोर सजा की सजा के साथ ही एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, अर्थदंड जमा हो जाने पर आधी धनराशि वादी मुकदमा को देने का आदेश दिया। मामले में आरोपी ससुर रामलखन को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। सास धर्मी की मौत होने के कारण उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। मामला कोतवाली घोसी क्षेत्र का है।
ये है मामला
अभियोजन के अनुसार भैरोपुर गांव निवासी रामविलास चौहान ने एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक 5 जनवरी 2016 को रात में उसकी पुत्री चंदा को दहेज के लिए उसके ससुराल जमालपुर मिर्जापुर में पति सुनील चौहान, ससुर रामलखन चौहान और सास धर्मी ने मुंह में कपड़ा ठूसकर, मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा दी थी। इससे चंदा की मौत हो गई। न्यायालय में पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी राजेश कुमार पांडेय ने 10 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद मामले में आरोपी ससुर रामलखन चौहान को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। पति सुनील चौहान को दहेज हत्या, प्रताड़ना और दहेज की मांग करने का दोषी पाया।