रतनपुरा। स्थानीय खंड विकास अधिकारी कार्यालय पर अपने विभिन्न कार्यों से आने वाले गांववासियों को निराशा ही हाथ लगती है। यहां आने वाले जरूरतमंदों को कार्यालय परिसर में संचालित होने वाले दफ्तरों के दरवाजे अधिकतर बंद ही मिलते हैं। इससे लोगों में निराशा होती है। ब्लॉक के दूरदराज गांवों से वृद्धा पेंशन ,दिव्यांग पेंशन, आवास एवं अन्य समस्याओं को लेकर फरियादी खंड विकास अधिकारी कार्यालय पर पहुंचते हैं लेकिन वहां अधिकांश कार्यालयों के दरवाजे बंद मिलते हैं। बुधवार को लगभग 10:30 बजे खंड विकास अधिकारी के स्थापना बाबू के कार्यालय का दरवाजा तो खुला था परंतु मुख्य लेखाकार एवं मनरेगा सेल के दरवाजे पूरी तरह बंद थे। इसके चलते दूरदराज से आने वाले लोगों को निराश लौटना पड़ा। इससे लोगों में व्यापक आक्रोश देखा गया। लोग दुर्व्यवस्था को कोसते हुए लौट गए।लोगों का कहना था कि खंड विकास अधिकारी कार्यालय की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। यहां14 सालों से कार्यरत परिचारक बाबू का काम करता है। ब्लाक पर आने वाले फरियादियों का कहना है कि वह परिचारक लोगों से सीधे मुंह बात तक नहीं करता है। ब्लाक के बड़े बाबू के कक्ष में और मनरेगा सेल के कक्ष पूर्णतया वातानुकूलित हो गए हैं। शिकायत कर्ताओं की शिकायत है कि वातानुकूलित कक्ष में बैठकर कर्मचारी अंदर से दरवाजा किए रहते हैं। जरूरतमंद आते हैं तो बाहर से ही दरवाजा बंद देखकर बैरंग हो जाते हैं। इस संबंध में बहरामपुर निवासी जितेंद्र कुमार ,विभौली निवासी रामभवन और रामसुमेर, करउत निवासी वीरेंद्र यादव , गाढा निवासी विवेक सिंह का कहना है कि वातानुकूल कमरे में बैठकर दरवाजा बंद कर कर्मचारी समय काटते हैं जिससे आवश्यक काम के लिए आने वाले लोग दर-दर भटकने को मजबूर होते हैं। लोगों ने खंड विकास अधिकारी से कार्यालय की दुर्व्यवस्था को दूर करने की मांग की है हर कार्यालय का दरवाजा खुला रहना चाहिए। दरवाजा बंद नहीं होना चाहिए। इस समय बाहर हूं, आने पर जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कराई जाएगी। दिवाकर सिंह, खंडविकास अधिकारी, रतनपुरा , मऊ।