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मुक्तिधाम को कटान से बचाने के लिए बनने लगे ठोकर

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दोहरीघाट। ऐतिहासिक धरोहर मुक्तिधाम तथा दोहरीघाट कस्बा को सरयू नदी की कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। रामपुर धनौली से मुक्तिधाम तक 833 लाख की लागत से 21 कटर ठोकरों का निर्माण शुरू हो गया। इससे कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों में खुशी है। नदी की प्रलयंकारी लहरों से मुक्तिधाम तथा दोहरीघाट कस्बे का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कस्बा सहित मुक्तिधाम को नदी की कटान से बचाने के लिए रामपुर धनौली से लेकर मुक्तिधाम तक 833 लाख के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। नदी पर नई बाजार के समीप फोरलेन पुल बन जाने तथा रेत पर फोरलेन की सड़क बनाए जाने से नदी की पूरी धारा रामपुर धनौली से लेकर मुक्तिधाम तक टकरा रही है। जिससे कटान भी तेजी से हो रही थी। इसे रोकने के लिए विभाग की तरफ से रामपुर धनौली से मुक्तिधाम तक 635 मीटर के बीच 21 कटर ठोकर बनाए जाने लगे हैं। अधिकारियों के अनुसार, नदी की गहराई मे नौ मीटर अंदर जाकर प्लास्टिक की बोरी मे मिट्टी भरकर नीचे के लेयर पर एपरन बनाया जा रहा है। उसके ऊपर 9 /10 की बोल्डर पीचिंग कर बोल्डर के 21 ठोकर बनाए जाएंगे। जिससे कटान का खतरा कम हो जाएगा। व्यवसायी कपूरचंद गुप्त ने बताया कि परियोजना की मांग लंबे समय से चल रही थी। पहले ही प्रोजेक्ट शुरू हो जाना चाहिए था। रिजवान अहमद का कहना था कि प्रोजेक्ट शुरू होने से कटान रुकेगी। व्यवसायी विकास वर्मा ने बताया कि नगर पूरी तरह से कटान के मुहाने पर है। कटान रोधी परियोजना पर कार्य खुशी की बात है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज ने बताया कि रामपुर धनौली से मुक्तिधाम तक नदी की कटान से बचाने के लिए 21 कटर ठोकरों का निर्माण शुरू हो गया है।
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