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लगातार खेतों में जल रही पराली

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परदहां ब्लाक के पिपरीडीह गांव में खेत में जलती धान की पताली। - फोटो : MAU
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पिपरीडीह। क्षेत्र के विभिन्न इलाकों के खेतों में पराली जलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पराली जलाने से उठ रहे धुएं से प्रदूषण फैल रहा है, लेकिन प्रशासनिक अफसर एक्शन में नजर नहीं आ रहे हैं। खेतों में उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है। सब कुछ जानकर आला अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। परदहां ब्लाक क्षेत्र के पिपरीडीह, भार, रैकवारेडीह, उस्मानपुर, ओन्हाईच, अहिलाद सहित विभिन्न गांवों में प्रशासन की सख्ती के बावजूद किसान लगातार खेतों में धान की पराली धड़ल्ले से जला रहे हैं। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा धान की कटाई के बाद अवशेष न जलाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन कुछ किसान इन जागरूकता कार्यक्रमों की धज्जी उड़ाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। धान की कटाई का काम अंतिम चरण पर है। किसानों को धान कटने के साथ ही खेतों में गेहूं फसल की बुआई करनी होती है। इसलिए किसान धान की पराली को खेत से उठाने के बजाए वहीं पर जला देते हैं। जिससे पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञ ओपी सिंह ने बताया कि खेत में किसी भी फसल का अवशेष जलाना उचित नहीं है। पराली जलाने से प्रदूषण तो बढ़ता ही है। साथ में जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। अवशेष जलाने से जमीन में कई मित्र कीट मर जाते हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इस लिए सभी किसान खेतों में पराली न जलाएं। मिट्टी पलट हल से गहरी जुताई कराई जाए।
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