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धीमी गति से चल रही सिल्ट की सफाई

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मझवारा में सिल्ट मिट्टी झाड़ से पटी खैरा पवनी माइनर।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। जिले की नहरों में सिल्ट की सफाई धीमी गति से चल रही है। इसे लेकर 14 दिसंबर तक नहरों को बंद कर दिया गया है। ऐसे में किसान खेतों की भराई नहीं कर सके हैं। जिले में 391 किमी की तीन नहरें हैं। शारदा सहायक लिंक नहर तो दोहरीघाट पंप कैनाल के भरोसे चलती है। वहीं लघु डाल पंप कैनाल खुरहट का भी यही हाल है। नवंबर माह बीतने में चंद दिन शेष रह गए हैं, लेकिन अभी तक मुख्य नहर सहित माइनरों से सिल्ट तथा साफ सफाई कार्य को पूरा नहीं किया जा सका है। रबी की बुआई का समय एक नवंबर से ही चल रहा है। धान की फसल कटने के बाद खेतों की भराई जरूरी है। भराई के समय नहरों के बंद चलने से किसान खेतों की भराई नहीं कर पा रहे हैं। नहर तथा माइनरें सिल्ट तथा खर पतवार से पटी है। माइनरों की सफाई के लिए सिंचाई विभाग को शासन से एक करोड़ की जगह महज 34.59 लाख रुपया मिल पाया है। ऐसे में सफाई कार्य धीमी गति से चल रहा है। किसानों को निजी संसाधनों से खेतों की भराई करनी पड़ रही है। दोहरीघाट पंप कैनाल नहर को 14 दिसंबर तक क्लोजर टाइम घोषित कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में कृषि योग्य कुल भूमि 145295.42 हेक्टेयर है। कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर लगभग 22 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। लेकिन पूरी क्षमता से न चल पाने से अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंचता है। तीनों प्रमुख नहरों की 70 माइनरें हैं। टेल तक तो पानी ही नहीं पहुंचता है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान ने बताया कि सिल्ट साफ सफाई के लिए नहर क्लोजर टाइम के तहत 14 दिसंबर तक बंद रहेगी। अभी सिल्ट की सफाई चल रही है। फिलहाल अभी किसानों की तरफ से पानी की डिमांड नहीं है।
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