लाकडाउन के दौरान नगर के रोडवेज परिसर के बाहर पसरा सन्नाटा।
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मऊ। हजारों यात्रियों से गुलजार रहने वाला रोडवेज डिपो पर लॉकडाउन के 40 दिनों से सन्नटा पसरा है। जबकि कार्यशाला में कर्मचारी मास्क और ग्लव्स पहनकर काम कर रहे हैं। जबकि परिसर में मौजूद दुकान के लोग इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहे। सहातदपुरा स्थित रोडवेज डिपो से लॉकडाउन से पहले प्रतिदिन 37 बसें विभिन्न रूटों पर संचालित होती थी। रोजाना इन बसों से 35 सौ से ज्यादा यात्री यात्रा करते थे। इन यात्रियों की आवाजाही से न केवल परिवहन निगम को लाखों का राजस्व मिलता था, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के दो दर्जन दुकानदार इसी के भरोसे परिवार का भरण पोषण करते थे। बीते 40 दिनों से लॉकडाउन घोषित होने के बाद यात्रियों से भरा रहने वाला रोडवेज में चारों तरफ सन्नाटा पसरा है। रविवार को अमर उजाला टीम डिपो पहुंची तो यहां वर्कशाप में कुछ कर्मचारी मास्क तथा ग्लव्स पहनकर काम करते दिखे। वहीं सहायक यातायात निरीक्षक सनाउल्ला बसों को व्यवस्थित कराते रहे। वहीं एक व्यक्ति मास्क तथा ग्लव्स लगाए बैठा मिला। पूछने पर उसने अपना नाम जसवंत बताया। बोला कि वह और के चालक है और उसकी ड्यूटी आपातकालीन में बस की आवाजाही के लिए लगी है। एआरएम विवेकानंद त्रिपाठी ने बताया कि लॉकडाउन के चलते प्रतिदिन रोडवेज को लाखों रुपये का राजस्व हो रहा है। रोडवेज डिपो के बगल में होटल संचालक रजत बरनवाल ने बताया कि लॉकडाउन के चलते भीड़भाड़ वाले रोडवेज डिपो में आज केवल सन्नाटा है। होटल बंद होने से न केवल उनके घर में आर्थिक तंगी आ गई है, बल्कि होटल में काम करने वाले कर्मचारियों को दिक्कत में हैं। वहीं इमरती बेचने वाले रमेश मद्देशिया ने कहा कि महामारी कहीं उनके घर के चूल्हे की आग को न ठंडा कर दे। बीते 40 दिनों से दुकान बंद होने से उनके परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति आ चुकी है। प्रतिदिन परिवार का भरण पोषण के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ रहा हैं।