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सेक्स वर्कर को सम्मान और गरिमा के अनुसार जीने का अधिकार:

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मऊ। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में टीआई परियोजना, बालवाणी समिति, चांदमारी इमिलिया के सभागार में राष्ट्रीय एड्स सोसाइटी के सहयोग से सेक्स वर्कर के कल्याण एवं उनके अधिकारों के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें सेक्स वर्करों को भी सम्मान से जीने के अधिकार पर बल दिया गया। विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश मे कहा कि सेक्स वर्कर को भी सम्मान और गरिमा के अनुसार जीने का अधिकार है, जिसे संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत मूल अधिकार घोषित किया गया है। यदि कोई महिला 18 साल से ऊपर की है और अपने स्वतंत्र सहमति से सेक्स वर्कर के रूप में कार्य करती है तो उसके विरुद्ध पुलिस द्वारा कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जाएगी। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वेश्यालय चलाना गैर कानूनी है, लेकिन स्वेच्छा से सेक्स करना अवैध नहीं है। इस दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश अग्रवाल, डीपीएम नागेंद्र पांडेय, अनिल कुमार, ,थानाध्यक्ष महिला कल्पना मिश्रा, मंजुला, नीलम व कलावती, आउट रिच वर्कर एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।
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