सरकार की तरफ से पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए खेलो इंडिया के तहत जिले में एक जिला, एक खेल में हॉकी को शामिल किया गया है। खिलाड़ियों को अभी तक डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ की सुविधा नहीं मिल सकी है। खिलाड़ियों को घास के मैदान पर प्रेक्टिस करना पड़ रहा है।
इससे खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के ट्रायल तथा प्रतियोगिताओं में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। हालांकि शासन स्तर से स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ मैदान स्वीकृत हो गया है। कार्यदायी संस्था नामित कर दी गई है। जिला मुख्यालय पर डॉ. अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आधुनिक खेल सुविधाओं का अभाव है।
शासन की तरफ से जिले मेें एक वर्ष पूर्व वन डिस्ट्रिक्ट, वन स्पोर्ट्स के तहत हॉकी को शामिल किया गया है। 30 खिलाड़ियों को हॉकी में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एक वर्ष बीत जाने के बाद चयनित हॉकी खिलाड़ियों को एस्ट्रोटर्फ की सुविधा नहीं मिल सकी है।
इस संबंध में खिलाड़ी सत्यम कुमार, आकांक्षा पांडेय का कहना था कि अभ्यास सामान्य ग्राउंड पर करने के बाद मैच एस्ट्रोटर्फ पर खेलना इतना आसान नहीं होता है। एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड खिलाड़ियों के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि इससे खिलाड़ी की फिटनेस पर असर पड़ता है। एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड पर गेंद रुकती ही नहीं है।
इसलिए खिलाड़ी निरंतर मैच खेल सकता है। जबकि सामान्य ग्राउंड पर ऐसा नहीं है। घास सख्त होने के कारण गेंद बार-बार रुक जाती है। जिससे खिलाड़ी को थकावट जल्दी हो जाती है। यदि एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड हो तो हॉकी से काफी संख्या में खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अधिकारियों की मानें तो शासन की तरफ से स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ स्वीकृत हो गया है।
कार्यदायी संस्था सिडको को नामित किया गया है। कार्यदायी संस्था स्टीमेट बनाकर शासन को भेजेगी। इस बाबत उप जिला क्रीड़ा अधिकारी मुकेश सब्बरवाल का कहना है शासन की तरफ से स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ स्वीकृत हो गया है। कार्यदायी संस्था सिडको को नामित किया गया है। कार्यदायी संस्था स्टीमेट बनाकर शासन को भेजेगी।