दोहरीघाट। सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। जलस्तर में 24 घंटे में 15 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। नदी के जलस्तर में घटाव से लोग राहत की सांस ले रहे थे, लेकिन बृहस्पतिवार को जलस्तर में 15 सेमी की वृद्धि होने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की बेचैनी बढ़ गई। हालांकि नदी अभी खतरा बिंदु से 1.15 मीटर नीचे बह रही है। गौरीशंकर घाट पर बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 68.75 मीटर था। जबकि बुधवार को यह 68.60 मीटर पर था। नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर तथा शाही मस्जिद पर खतरा मंडराने लगा है। वही तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नईबाजार, नवली, चिऊटीडांड, पतनई, सरया, बीबीपुर, गोधनी, ठाकुर गांव, गौरीडीह, कोरौली, बेलौली, पाऊस, महुआ बारी, ठीकरहिया, महुअबारी, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गांवों में एक बार फिर बाढ़ से फसलों के नुकसान व कटान का भय बना हुआ है। अधिकांश कटान पीड़ित अपने आशियाने को छोड़ सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं जबकि जो बचे हैं अब भी सुरक्षित ठिकाना ढूंढ रहे है। उधर, प्रशासन की ओर से अभी तक कटान पीड़ितों को राहत नहीं मिल सकी है। सरयु नदी का जलस्तर कम होने के बाद लगातार कटान की समस्या बढ़ रही है। इसको लेकर मधुबन तहसील द्वारा बृहस्पतिवार को ग्रामीणों को अर्लट कर दिया गया है। मधुबन तहसील क्षेत्र के धर्मपुर बिशुनपुर के बिंटोलिया के नयी बस्ती पुरवा में नब्बे प्रतिशत पलायन करने के बाद भी शेष बचे ग्रामीणों को भी गांव खाली करने के लिए तहसील प्रशासन द्वारा अलर्ट कर दिया गया है। उधर लगातार कटान को देखते हुए नयी बस्ती के ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से कटान का रफ्तार बढ़ रहा है उस तरह से अगल बगल के और भी पुरवा को खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों के अनुसार कटान की स्थिति यह है लगभग एक दिन में एक बिगहा के आसपास जमीन कट रही है।