दुबारी क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मार्ग डूबने के बाद नन्द के पुरा से बाजार के लिए जाते ?
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दुबारी। मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा से होकर गुजरने वाली सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार तेज हो गई है। नदी खतरा निशान से पांच सेमी ऊपर होने से दो दर्जन से अधिक गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। हजारों एकड़ फसल जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन की तरफ से 41 नावों की व्यवस्था की गई है। लेकिन लोगों को जरुरत के समय उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जान जोखिम में डालकर गहरे पानी से होकर आने जाने को विवश हैं। सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। अब लोगों को वर्ष 1998 में आई बाढ़ में हुई तबाही की चिंता सताने लगी है। नदी के जलस्तर पर डाला जाए तो बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 66.36मीटर रहा। बुधवार को 66.20 मीटर रहा। जबकि हाहानाला पर खतरा बिंदु 66.31मीटर है। नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से ऊपर पहुंचते ही देवारा इलाके के धर्मपुर बिंदटोलिया, हरिलाल का पुरा, नकीहवा, धुस पुरा, मनमन का पुरा, बिशुन पुरवा, विंदर का पुरा, बईरकंटा पुरा, भगत का पुरा, चौहानपुर, बरोहा, कुंवरपुरवा, पब्बर पतुरा, परसिया भटोली, चक्कीमूसाडोही, हरिलाल का पुरा सहित एक दर्जन से अधिक गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। संपर्क मार्गो पर जलभराव होने से लोगों को जान जोखिम मेें डालकर आना जाना पड़ रहा है। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय नकिहवा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय टाड़ी, धर्मपुर बिशुनपुर प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिंटोलिया ,धर्मपुर बिशुनपुर प्राथमिक विद्यालय खैरा तथा हरिजन मिश्रित प्राइमरी पाठशाला आदि के विद्यालयों के मार्ग डूबे हुए हैं और विद्यालय परिसर भी जलमग्न हो गया है। गांवों में नदी के बाढ़ का पानी पहुंच गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र दुबारी में आठ, धर्मपुर बिशुनपुर में 18 और चक्कीमुसाडोही में 15 नाव लगाई गई है। लेकिन जरुरत के अनुरुप नाव उपलब्ध न होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर आना जाना पड़ रहा है।